बच्चा रोता नजर आए, परेशान दिखे तो माता- पिता घबरा जाते हैं। ज्यादा देर सोया रहे और रोने की आवाज आए तो कई बार जाकर उसे देखते हैं। थोड़ा बड़ा हो और चलने लगे तो हर कदम पर उसके साथ कि कहीं गिर जाए। घर का ऐसा छोटा मोटा सामान जिससे उसे चोट पहुंच सकती है वो हटा दिया जाता है। वजह क्योंकि वह आप पर निर्भर रहता है। अधिक उम्र में माता- पिता या दादी को भी आपके इसी सहारे की जरूरत होती है। जिन्होंने कभी आपके हर कदम को संभाला क्या आप भी उनका उतना ख्याल रख पाते हैं।
-65  वर्ष से अधिक उम्र के एक तिहाई लोगों को हर साल गिरने से चोट लगती है। यह रिस्क उम्र के साथ बढ़ने लगती है। घर बनवाते वक्त वृद्धजन की जरूरतों का ख्याल रखा जाना चाहिए। यह हम सभी की प्राथमिकता होनी चाहिए। क्या उनकी जरूरत और आराम के मुताबिक आपने अपने घरों में बदलाव किए हैं।

-बाथरूम या अन्य गीली जगहों पर एक एंटी स्किड मैट रखें ताकि वो फिसले नहीं। जरूरत का सामान, दवाएं, किताबें ऐसी जगह रखें जहां से निकालने में उन्हें आसानी हो। डाइनिंग हॉल में हल्की कुर्सियां आदि रखें ताकि वे आसानी से उन्हें उठा सकें।
-बुजुर्ग व्यक्ति के लिए बाथरूम में बार्स या रैलिंग लगवा सकते हैं, ताकि वो आसानी से पहुंच सकें। इसी तरह घर में जहां भी सीढ़ियां हों वहां रैलिंग लगवाएं साथ ही सीढ़ियों की शुरुआत और अंत पर रोशनी रहे इसका ध्यान जरूर रखें।
-सबसे ज्यादा जरूरी है कि हम उन्हें गिरने से बचाएं। छोटा-छोटा फर्नीचर, इलेक्ट्रिकल कॉर्ड और घर की हर उस चीज को हटा दें जो उनके रास्ते में हो या जिससे उन्हें चोट पहुंच सकती है। सुरक्षा ही नहीं उनके आराम का भी ध्यान रखें।
-परिवार में बुजुर्ग बीमार हैं चलने में सक्षम नहीं हैं तब उनका ध्यान अपने छोटे बच्चे की तरह रखें।
-घर का ऐसा कमरा दें सकते हैं जहां से वो आपके नजदीक हों।
-संभव नहीं तो उन्हें कॉर्डलेस बेल दें ताकि जरूरत पड़ने पर वे आपको बुला सकें।
-उनके दर्द और बातों की यह कहकर अनदेखी करें कि इस उम्र में कुछ कुछ परेशानी तो रहेगी ही। हम सभी को इस अवस्था से गुजरना है।
– अब जब वे खुद बाहर नहीं जा सकते तो उनके अकेलेपन का अंदाजा लगाएं। उनसे ऐसी बातें करें जिनसे उन्हें अच्छा महसूस हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *