हम ऐसे लोगों के साथ बेहतर महसूस करते हैं जिन्हें हम पसंद करते हैं या जिनका आदर करते हैं। हमें ऐसे दोस्तों को ढूंढना है नए रिश्ते बनाने हैं और अपना सपोर्ट सिस्टम मजबूत कीजिए।
बड़े शहरों में वो कुछ सपने लेकर आई। ताकि बेहतरीन जिंदगी मिले। जॉब के अवसर कम और पति के अक्सर बाहर रहने से अकेलापन महसूस करने लगी। एक वक्त था वो हर किसी से नहीं मिलती थी। अब वो सब्जी की दुकान पर जाती है ताकि नए लोग मिले जिनसे वो कुछ बात कर सके। हम अक्सर तभी मानव संबंधों का मूल्य समझते हैं जब हम एकाकीपन की अवस्था में जाते हैं। लोगों से मिलना जुलना हमारे जीवन रूपी खाने की मुख्य सामग्री है। इससे हमारी मानसिक सेहत निर्धारित होती है। अकेले लोग अक्सर सामाजिक संबंधों से डरने लगते हैं। उन्हें नकारात्मकता का भय सताता है। ऐसे लोगों मेंं अवसाद की समस्या ज्यादा होती है।

शोध बताते हैं लोगों से मिलना जुलने से हमारा इम्यून सिस्टम तेज होता है। इंटरल्यूकिन 6  नामक हानिकारक तत्व का स्तर कम होता है। यह तत्व डिमेंशिया, दिल की बीमारियों, ओस्टियोपोरोसिस की वजह बनता है। यानी लोगों का साथ मानसिक शांति देने के साथ आपको स्वस्थ भी बनाता है। अफ्रीका में उबंतु भाषा का अर्थ है एक व्यक्ति असल मायने में मनुष्य दूसरे व्यक्ति द्वारा ही बनता है। जितने ज्यादा रिश्ते उतनी ज्यादा भावनाएं। इससे हम दूसरों को नुकसान पहुंचाने के बारे में कतई नहीं सोचेंगे।
तो जानिए कैसे बढ़ाएं सोशल कनेक्शन-
पहला सपोर्ट सिस्टम खोजें:
फेसबुकपेज पर कितने लाइक्स मिले या वॉट्स एप पर कितने ग्रुप का हिस्सा हैं यह रिश्ते नहीं हैं। सोचें कि इतनी लंबी लिस्ट में कितने ऐसे हैं जो वाकई आपके दोस्त हैं। ऐसे लोगों को देखें जिन्हें आप मदद के वक्त ही नहीं बेवजह भी याद करते हों।

रिश्तों में निवेश करें:
जैसेआप जिम में सदस्यता लेती हैं उन्हें वक्त देती हैं िनवेश करती हैं। ठीक उसी तरह ऐसे रिश्तों में निवेश करें जहां विचारों को साझा कर सकती हैं। भावनाओं को बेझिझक कह सकती हैं। नए लोगों को अपने समुह में जोड़ें।

सामाजिक कौशल निखारें:
अकेलापन इसलिए क्योंकि हम में वो कौशल नहीं होता जो रिश्ते बनाने के लिए चाहिए। नए लोगों से हैलो कहिए। कार्यस्थल पर हैं तो घर या बच्चों के बारे में बात करें इससे अपनापन बढ़ेगा। लोगों से उनके विचार और आइडिया जानें। मानकर चलिए वे खुश होंगे।
बदलाव लाएं:
नए वातावरण से डर है या भाषा से झिझक। कुछ ऐसा है जो आपको नए लोगों से जुड़ने से रोकता है तो उस पर काम करें। आप अकेले नहीं है जो ऐसा महसूस करते हैं। आगे बढ़िए और रोजमर्रा की जिंदगी में सामाजिक संबंधों की सुरक्षा ढाल बनाइए।

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