Ananya Birla Biography is an inspiration to one and all to reach new heights by achieving and exploring new arena. Read on.

छोटी उम्र में ‘स्वतंत्र’ सोच

देश के अरबपतियों के बेटे-बेटी कारोबार में नया मुकाम हासिल कर रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं अनन्या बिड़ला। इन्होंने हाल ही में एक ई‑काॅमर्स कंपनी बनाई है। इस छोटी-सी उम्र में अनन्या जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही हैं, उससे यह लगने लगा है कि आने वाला कल उनका होगा। अनन्या भारत के मशहूर बिड़ला औद्योगिक घराने से हैं। फोर्ब्स पत्रिका के मुताबिक, उनके पिता कुमार मंगलम बिड़ला देश के आठवें सबसे अमीर व्यक्ति हैं। लेकिन अनन्या बिजनेस जगत में अपना मुकाम खुद बनाना चाहती हैं। अनन्या ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स और मैनेजमेंट की पढ़ाई की है।

अपने शरीर पर पांच टैटू बनवा चुकीं अनन्या को म्यूजिक और गिटार बजाने का भी शौक है। भविष्य में अपना खुद का एलबम भी लांच करने की योजना रखती हैं। वो शतरंज और टेबल टेनिस की बहुत अच्छी खिलाड़ी हैं। उन्होंने इन खेलों को राष्ट्रीय स्तर तक खेला है। अनन्या का कहना है कि वह जीवन में दो महिलाओं से बेहद प्रभावित रही हैं। पहली मदर टेरेसा और दूसरी उनकी घरेलू सहायिका लता। उन्होंने सिर्फ 12 साल की उम्र में कविता लिखनी शुरू कर दी थी। उनको लॉन्ग ड्राइव्स पर जाना पसंद है। उनके पास दो कारे हैं जिनमें बीएमडब्ल्यू जेड4 और मिनी कूपर शामिल है।

कैसे आया आइडिया

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शाखाएं स्वतंत्र कंपनी की 2 राज्यों में हैं, इनमें 100 से अधिक कर्मचारी हैं।

उम्र : 21
फाउंडर और चेयरमैन, स्वतंत्र माइक्रोफाइनेंस लिमिटेड
एजुकेशन:
इकोनॉमिक्स और मैनेजमेंट, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी
फैमिली नेटवर्थ :
587 अरब रुपए

कॉर्पोरेट घरानों में ऐसी परंपरा है कि बच्चे अपने खानदानी बिजनेस को ही चलाते हैं। लेकिन कुमार मंगलम बिड़ला की बेटी अनन्या ने इस रुझान के खिलाफ रास्ता चुना। उन्होंने स्कूल में ही फैसला कर लिया था कि वह सामाजिक उद्यमी बनेंगी।

म्यूजिक का शौक

तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी अनन्या जब ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थीं, तब साल के कुछ महीने वह मुंबई में अपने माइक्रोफाइनेंस फर्म को देती थीं। माइक्रोफाइनेंस कंपनी खोलने का विचार उनके दिमाग में आंध्र प्रदेश में गरीब लोगों से ज्यादा ब्याज वसूलने से उपजे कोलाहल से आया था। वो कहती हैं कि स्कूल से घर आने के समय रास्ते में एक व्यक्ति नारियल पानी की दुकान लगाता था। हम सभी भाई-बहन उसकी दुकान पर नारियल पानी पीने के लिए रुकते थे। साल दर साल यह सिलसिला चलता रहा और मैंने कभी भी उसका बिजनेस बढ़ते हुए नहीं देखा। मैंने उससे पूछा कि आखिर क्यों वह वहीं रह गया और आगे नहीं बढ़ पाया, तो उसने इसका कारण पूंजी की कमी बताया। उसके अनुसार बैंक उसे कर्ज देने के लिए तैयार नहीं थे, क्योंकि उसके पास बैंक को गारंटी देने के लिए कुछ नहीं था। इसी कारण अनन्या ने ऐसे छोटे कारोबारियों के लिए काम करने का मन बनाया।

3 साल पहले बनाई पहली कंपनी
अनन्या ने लगभग 3 साल पहले 1 मार्च 2013 को अपनी पहली कंपनी लॉन्च की। इस कंपनी का नाम स्वतंत्र है। यह कंपनी माइक्रोफाइनेंस के क्षेत्र में काम करती है और इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण उद्यमियों, विशेषकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। इसकी की सफलता से उत्साहित अनन्या ने इसी महीने क्यूरोकार्ट डॉट काॅम के नाम से एक ई-कॉमर्स वेबसाइट बनाई है। इसके जरिए वे एशिया और यूरोप के 9 देशों से लाई गईं लग्जरी घरेलू सजावटी वस्तुओं की बिक्री करेगी। अनन्या कहती हैं कि स्वतंत्र पूरी तरह से एक स्टार्टअप है। उनके परिवार द्वारा इसे फंड दिया गया था, लेकिन इसके बाद इस फर्म में सलाह और फीडबैक को छोड़कर परिवार की अन्य कोई भूमिका नहीं है।

Ananya Birla Biography

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