जिंदगी पर कविता | Hindi Me Kavita on Life
जिंदगी पर कविता | Hindi Me Kavita on Life डगमगाते क़दमों को संभालते संभालते, निकल पड़ी मंज़िल पाने. उलझी उलझी राहों पर विजय श्री की पताका फहराने, भटकती सी राहों…
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जिंदगी पर कविता | Hindi Me Kavita on Life डगमगाते क़दमों को संभालते संभालते, निकल पड़ी मंज़िल पाने. उलझी उलझी राहों पर विजय श्री की पताका फहराने, भटकती सी राहों…
अपने शब्दों की शब्दावलीबनाने लगी तो अभाव हो गया पृष्ठों का,अपनी खुशियों को संभालने लगी तो हृदय भवन कमपड़ गया.अपनी आशाओं के पंख फैलाये जाने पर,विशद गगन कम पड़ गया.अपने…