जिंदगी पर कविता | Hindi Me Kavita on Life डगमगाते क़दमों को संभालते संभालते, निकल पड़ी मंज़िल पाने. उलझी उलझी…
अपने शब्दों की शब्दावलीबनाने लगी तो अभाव हो गया पृष्ठों का,अपनी खुशियों को संभालने लगी तो हृदय भवन कमपड़ गया.अपनी…
सब कुछ पा लिया,अपना लिया, पर अपनाया न गया अपनत्व इतनी खुशियां किसी को न मिली होंगी कदाचित, इतना विलक्षण…