वास्तु के अनुसार पेड़ पोधे | |Plants according to Vastu

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वास्तु के अनुसार पेड़ पोधे | Vastu ke Anusar Ped Podhe in Hindi
वास्तु के अनुसार पेड़ पोधे | Vastu ke Anusar Ped Podhe in Hindi

वास्तुशास्त्र का वैदिक विज्ञान हमेï निरंतर प्रकृति के साथ संतुलन एवं तालमेल बैठाए रखने की दिशा मेïे प्रेरित करता रहता है। इससे यह स्पष्टï होता है कि हमारी चेतना जितना अधिक पर्यावरण की पवित्रता पर केïद्रित रहेगी, उतना ही अधिक प्रकृति का सौïदर्य बढ़ेगा।
पंच तत्वोï के संतुलन मेï सहायक प्रकृति की सुंदर छटा सृष्टिï के पंच तत्वोï को सैद्धांतिक आधार पर कुछ इस तरह से व्यवस्थित करने का अद्ïभुत गुण रखती है, जिससे उसके संपर्क मेï रहने वाले प्रत्येक प्राणी को दैहिक, दैविक, भौतिक एवं आत्मिक सुखोï की प्राप्ति हो। पर्यावरण से उपरो1त लाभ प्राप्त करने के लिए हमेï प्रकृति के नजदीक जाना होगा। जिसका सरल एवं चिरस्थायी समाधान है अपने घर के भीतर व आसपास यथोचित अधिक से अधिक पेड़-पौधे उगाना। आप अपने मकान के खुले स्थान पर एक सुंदर-सा बगीचा बनाएं तो पूरा घर तरोताजा हवा एवं प्राकृतिक सौïदर्य से सराबोर रहेगा। ऐसे मकान मेï रहने से आपको वास्तुशास्त्र मेï वर्णित सकारात्मक ऊर्जा का लाभ मिलेगा व साथ ही आपको मिलेगी जीवन की सुख, समृद्धि, उन्नति एवं खुशहाली। परंतु जहां तक किसी भी भवन मेï पेड़-पौधे, घास एवं अन्य प्रकार के फूलोï के पौधे आदि लगाने का सवाल है तो वास्तुशास्त्र के सिद्धांतोï के अनुसार ये सब आप कुछ इस प्रकार प्रयोग मेï ला सकती हैï जिससे कि आपके घर-आंगन के पेड़-पौधे घर के आंतरिक एवं बाह्य वास्तु ऊर्जा क्षेत्रोï से सही तालमेल बनाए रखने एवं सृष्टिï के पांच तत्वोï (भूमि, वायु, जल, अग्नि एवं आकाश) के परस्पर संतुलन मेï सहायक होï।
खाली स्थानोï पर लगाएं पौधे किसी भी भवन मेï पेड़-पौधोï को उगाने के विषय मेï वास्तुशास्त्र के अंतर्गत व्यापक रूपरेखा तैयार की गई है। जैसा कि हमेï मालूम है कि पेड़-पौधोï मेï भी जीवन होता है अत: वनस्पति जगत की जीवंत ऊर्जा का सही प्रयोग हमेï स्वस्थ एवं प्रसन्न रख सकता है। बस केवल आपको यह ध्यान रखना होगा कि आपके घर के भीतर, बाहर या आसपास ऐसा कोई भी पेड़-पौधा न हो जो कि वास्तुशास्त्र मेï वर्णित नकारात्मक ऊर्जा का उत्सर्जन करता हो। आप अपने घर के मु2य द्वार के आसपास एवं पूर्व, उळार तथा पूर्वोळार दिशाओï की बालकनी पर स्वागत का आभास दिलाते पौधे जैसे-गुलाब, बेला, चमेली, ग्लेडियोलाई, कॉसमोस, कोचिया, जीनिया, गेंदा और सदाबहार जैसे फूलोï के पौधे लगाएं। बड़ा या खुला आंगन न होने की स्थिति मेï आप उन्हेï उपरो1त तीनोï दिशाओï की दीवारोï, छज्जोï या पोर्च आदि मेï लटका भी सकते हैï। स्थानाभाव मेï लोहे या सरिये के स्टैïड मेï लगे गमलोï मेï भी इनका प्रयोग किया जा सकता है। यदि आपका घर पश्चिम या दक्षिणमुखी हो तो भी आप अपने भवन के पीछे के खाली स्थान पर जो कि पूर्व, उळार अथवा पूर्वोळार मेï स्थित हो उपरो1त सभी पौधे लगा सकती हैï। जबकि पश्चिम एवं दक्षिणमुखी भवन के आगे या मु2यद्वार की ओर बड़े-बड़े पेड़-पौधोï एवं लताओï का प्रयोग करने की सलाह वास्तुशास्त्र मेï दी जाती है।
पेड़-पौधोï द्वारा ऊर्जा को करेï संतुलित
वास्तु के सिद्धांतोï मेï यह तथ्य विशेष महत्व रखता है कि ब्रह्मïांड मेï दो तरह की ऊर्जा तरंगेï विद्यमान हैï वे हैं- सकारात्मक एवं नकारात्मक। सकारात्मक ऊर्जा तरंगें सदैव पूर्व दिशा से पश्चिम की ओर, उळार दिशा से दक्षिण की ओर एवं पूर्वोळार से दक्षिण-पश्चिम के नैऋत्य कोण की ओर प्रवाहित होती हैï। अत: यह ध्यान जरूर देï कि पूर्व एवं उळार दिशा मेï केवल हलके, छोटे व कम घने पेड़-पौधे लगाएं, जिससे कि इन दोनोï दिशाओï से आकर हमारे भवन मेï प्रवेश करने वाली सकारात्मक ऊर्जा के रास्ते मेï कोई रुकावट न आए। यह और भी अच्छा रहेगा कि इन पौधोï से मन को अच्छी लगने वाली सुगंध आए। इन दिशाओï को और सकारात्मक बनाने के लिए यहां पर आप तुलसी के पौधे लगाएं। मरकरी अर्थात पारा नामक सूक्ष्म पोषक तत्व की उपस्थिति एवं स्वास्थ्यवद्र्धक तैलीय प्रकृति के कारण तुलसी के आसपास से होकर गुजरने वाली हवा शुद्ध एवं स्वास्थ्यप्रद हो जाती है। ऐेसी मंद सुगंध वाली वायु भवन मेï रहने वाले परिवार के सभी सदस्योï के मन को प्रफुल्लित कर देती है। तुलसी के पौधे की एक प्रजाति जिसे श्यामा तुलसी या काली तुलसी के नाम से भी जाना जाता है वह और भी अधिक सकारात्मक वायु और ऊर्जा प्रदान करती है। इसके अतिरि1त यहां पर अन्य औषिधीय पौधे, जैसे-पुदीना, लेमनग्रास, खस, धनिया, सौïफ, हलदी, अदरक के पौधे आदि की उपस्थिति भी हमेशा आपके तन-मन मेï ताजगी चुस्ती-स्फूर्ति एवं आरोग्य प्रदान करते रहेïगे।
बचेï नकारात्मक ऊर्जा से
बड़े पेड़ोï एवं लताओï की श्रेणी मेï वे सभी बड़े व ऊंचे पेड़ आते हैï जो कि देखने मेï सुंदर व घने होते है परंतु इस श्रेणी मेï भी बरगद, पाकड़, गूलर, पीपल, इमली, बेर व बबूल या कीकर जैसे पेड़ोï को घर के भीतर या आसपास नहीï उगाना चाहिए 1योïकि इनकी जड़ें मकान की नीïव व दीवारोï के लिए अच्छी नहीï होतीï, दूसरे इन पेड़ोï को उल्लू, चमगादड़ आदि अपने निवास के लिए चुनते हैï, जिनमेï कि रैबीज के कीटाणु, फफंूद, बै1टीरिया व ऐसी ही अन्य बुराइयां होती हैï, जिनको कि वास्तुशास्त्र की श4दावली मेï नकारात्मक की श्रेणी मेï रखा जाता है। यह सर्वविदित है कि एक स्वस्थ शरीर मेï स्वस्थ मन का निवास होता है एवं यह तो स्वयंसिद्ध है कि एक स्वस्थ मन ही जीवन के चतुर्मुखी विकास, परिवार मेï आपसी सौहाद्र्र एवं उच्च सामाजिक प्रतिष्ठïा को आगे बढ़ाने मेï सहायक होता है।
वास्तव मेï वैदिक वास्तुशास्त्र के प्रत्येक सिद्धांत एवं दिशा-निर्देश के पीछे कोई न कोई कारण या वैज्ञानिक आधार छिपा होता है।
इन बातोï का रखेï विशेष ध्यान
आप यह भी ध्यान देï कि टीले, कृत्रिम पहाड़ी या ऊंचा स्थान अपने लॉन, बाग-बगीचे मेï ईशान कोण पूर्व एवं उळार दिशा मेï न बनाकर दक्षिण-पश्चिम दिशा मेï स्थित नैऋत्य कोण पर या दक्षिण एवं पश्चिम दिशाओï मेï ही बनाएं तथा इनका ढलान दक्षिण से उळार दिशा की ओर या फिर पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर ही रखेï। सिंचाई का फव्वारा, बोरिंग, ट्यूबवेल आदि पूर्वोळार दिशा मेï ही बनाएं। अपने लॉन को पेड़-पौधोï से सजाते समय या फिर कच्ची भूमि या खुले आंगन के अभाव मेï पेड़-पौधे लगाते समय नि6नलिखित कुछ बिंदुओï पर भी विशेष ध्यान देï जैसे :
१. कभी भी कै1टस (नागफनी परिवार) के ऐसे तीखे चुभने वाले कांटे यु1त पौधोï का इस्तेमाल न करेï जो कि रेगिस्तान के निर्जन, निर्जल एवं शुष्कता की कामना करते रहते हैï।
२. बोनसाई बनाए हुए पौधे भी भवन मेï न रखेï 1योïकि ये वे पौधे होते हैï जो कि एक लंबा जीवन जीने के लिए बने होते हैं परंतु बोनसाई बनाने हेतु इनकी मु2य जड़ को काट दिया जाता है जिससे कि इनकी बढ़वार एक पेड़ की तरह न हो सके। इस कारण ये पेड़ केवल सहायक जड़ोï के सहारे जिंदा रहते हैï। पीपल, बरगद, पाकड़ एवं ऐसे अन्य पेड़ोï के तैयार किए गए बोनसाई इसके अच्छे उदाहरण हैï। अपर्याप्त पोषण के कारण ये पौधे घुट-घुटकर जीते हैï और इनका स्वाभाविक विकास भी अवरुद्ध हो जाता है। वास्तु के अनुसार घर के भीतर बोनसाई पौधे रखने से बच्चोï के शारीरिक और मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
३. इन पौधोï की ही तरह वास्तु मेï उन पौधोï को भी नकारात्मक पौधोï की संज्ञा दी गई है जिनको तोडऩे पर दूध जैसा तरल पदार्थ निकलता हो। रासायनिक तत्वोï के एक विशेष संयोजन से बना यह द्रव क्षारीय प्रकृति का होता है एवं हमारी कोमल त्वचा पर एलर्जी कर सकता है। उदाहरण के लिए जंगली आक का पौधा, रबर प्लांट या फिर इसी प्रकार के अन्य पौधे। उपरो1त प्रकार (कै1टस, बोनसाई, दूध जैसा द्रव छोडऩे वाले) के पौधोï को वास्तुशास्त्र मेï नकारात्मक पौधोï की संज्ञा दी गई है। घर मेï ऐसे पौधोï की उपस्थिति शुभ फलदायी नहीï मानी जा सकती। इसलिए इनके प्रयोग की वास्तु मेï सिफारिश नहीï की जाती।
४. अगर आप इन निर्देशोï का पालन करेïगी तो आप अपने घर के पेड़-पौधोï से वास्तुशास्त्र का अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकती हैï।

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