श्रद्धा व भक्ति का त्यौहार : कृष्ण जन्माष्टमी

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    कृष्ण जन्माष्टमी,गोकुलष्टमी,श्रीकृष्णजन्माष्टमी आदि अनेक नामों से जाना जाने वाला यह त्यौहार भारत ही नहीं विश्व भर में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है और इस के लिए सब के मन में विशेष उत्साह होता है।

    भारतीय पंचांग के अनुसार श्रावण माह के शुंक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के आठवें दिन मनाया जाता है।
    यह त्यौहार भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है,जिसमें भगवान श्री कृष्ण के जीवन को चित्रित करते हुए रासलीला की जाती है और इस उत्सव का उत्कर्ष होता है मध्य रात्रि को,जब भगवान श्री कृष्ण का जन्म होता है।

    उस समय भजन गाए जाते हैं, और भगवान श्री कृष्ण की स्तुति की जाती है। छोटे बच्चे जो कि भगवान श्री कृष्ण की वेशभूषा से सुसज्जित होते हैं, भगवान कृष्ण की भूमिका को विभिन्न रूपों में मोहक रूप में दर्शाते हैं। प्राचीन समय की कथा- कहानियों क ो लोक नृत्यों व गीतों के माध्यम से वर्णित किया जाता है । इस त्यौहार की महत्ता विश्व भर में है । इसके साथ अनेक कथाएं व कहानियां जुड़ी हैं और यह हजारों वर्ष प्राचीन हैं। भगवान विष्णु के अवतार के रूप में श्री कृष्ण का जन्म इसको इंंगित करता है । द्वापर युग में श्रावण माह के दूसरे पखवाड़े के आठवें दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्म दुष्ट कंस का अंत करने के लिए हुआ,उन्होने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होगी, दुष्टों का संहार करने के लिए मैं अवतार लूंगा । उन्हें मानवता के रक्षक के रूप में जाना जाता है । देवकी,जो कि कंस की बहन थी और वसुदेव के पुत्र के रूप में भगवान कृष्ण का जन्म बंदीगृह में हुआ। जन्म से उन्होने असाधारण शक्तियों का प्रदर्शन किया और दर्शाया कि वे साधारण बालक नहीं हैं, नंदगांव में श्री कृष्ण को भाग्योदय का प्रतीक माना जाने लगा। हजारों वर्ष बाद भी आज लोग श्री कृष्ण के जन्मोत्सव क ो व्रत रखकर व मिष्ठान्न सेवन कर मनाते हैं।
    भगवान कृष्ण के अनेक रूप हैं-मित्र,प्रेमी,एक दैवीय गुरू आदि । श्री कृष्ण क ी अनेक रूपों में भक्ति की जाती है और इस त्यौहार को अनन्य भक्त अगाध श्रद्धा व भक्ति से मनाया जाता है। झूले झूलना इस त्यौहार पर बेहद मांगलिक माना जाता है- विशेषकर ग्रामीण इलाकों में। भगवान श्री कृष्ण को दूध व इससे बने मिष्ठान्नों के बेंहद शौकीन होने के कारण उन्हें इन्हीं उत्पादों का भोग लगाया जाता है । भोग लगाने के पश्चात् उसे प्रसाद रूप में भक्तगण ग्रहण करते हैं। महाराष्ट्र में दही हाण्डी को विशेष उमंग से मनाया जाता है, इसमें मिटट्ी की हाण्डी को रस्सी पर ऊंचाई पर टांगा जाता है, जिसमें भगवान कृष्ण के प्रिय दूध-दही आदि रखे रहते हैं, और उसे प्राप्त करने के लिए उत्साही भक्तगणों की टोलीयां इस तक पहुंचने का प्रयास करती है । पिरामिड के रूप में सबसे ऊपर पहुंचने वाला व्यक्ति माखन भरी हाण्डी को फोड़ता है। आजकल इन हाण्डियों को फोडऩे के लिए पुरूस्कार भी रखे जाते हैं।

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