रेजोनेंस कोचिंग

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    राजस्थान के कोटा शहर को शिक्षा नगरी कहलाने का श्रेय जिन लोगों को है, उनमें एक नाम रेजोनेंस कोचिंग संस्थान के प्रबंध निदेशक आर के वर्मा क ा भी है। रामगंजमंडी के समीप खानकुंभकोट में वर्ष 1972 में जन्मे आर के वर्मा के पिता यहां की एसोसिएटेड स्टोन इंडस्ट्रीज में ही कार्यरत थे। शुरु में इनके परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी, पैसा कमाने के लिए जी तोड़ मेहनत करनी पड़ती थी। कुछ वर्ष बाद इनका परिवार झालावाड़ जिले के कुकलवाड़ा गांव में आ गया। प्राइमरी शिक्षा पूरी करने के बाद सैकंडरी एवं हायर सैकंडरी की पढ़ाई के लिए 10 किमी. दूर के एक स्कूल में प्रवेश लिया जहां अकसर साइकिल से एवं इसके पंचर होने पर कभी कभी पैदल भी जाना पड़ता था।
    उस समय जीवन यापन करना बड़ा मुश्किल था। पिता को सहयोग देने के लिए गर्मी की छुट्टियों में कोटा स्टोन की एएसआई कंपनी में पिता के साथ काम भी किया। कुशाग्र बुद्धि होने के कारण कक्षा 12 में प्रथम श्रेणी से पास होने के बाद वर्ष 1990 के आईआईटीजेइेई में भी प्रथम बार मेें ही चयनित हो गए। वर्ष 1994 में आईआईटी मद्रास से बी टेक करने के बाद आप बीएचईएल झांसी में ट्रेनी इंजीनियर के रूप में काम करने लगे लेकिन पढ़ाई को आगे जारी रखा। तत्पश्चात् आईएएस परीक्षा में भाग्य आजमाने की सोची और पढ़ाई शुरु कर दी, जिसका परिणाम यह रहा इसके प्री एक्जाम में सफल हो गए। अब तो आईएएस अफसर बनने का नशा दिमाग में छाने लगा जोर शोर से मुख्य परीक्षा के लिए पढ़ाई शुरू कर दी, परंतु धन का अभाव अभी भी बना हुआ था।

    इसके चलते कोटा की एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान में आईआईटी जेईई की तैयारी के लिए छात्रों को फिजिक्स पढ़ाने का अवसर मिला जिसे बखूबी निभाया और यहीं से प्रेरणा मिली कि क्योंं न अपना स्वयं का ही ऐसा संस्थान शुरू किया जाए। तभी अपने आप को फिजिक्स टीचर के रूप में स्थापित किया और छात्रों को मार्गदर्शन देने लगे।
    इस दौरान अपनी क्रिएटिविटी, एडमिनिस्ट्रेटिव एवं मैनेजिरियल स्किल्स से वर्ष 2001 मेें आईआईटी-जेईई के छात्रों को कोचिंग देने के लिए अपने मित्रों सतीश शर्मा व लोकेश खंडेलवाल के सहयोग से रेजोनेंस की स्थापना की। प्रथम वर्ष में जीतोड़ मेहनत करने के बाद जब परिणाम आया तो इस परीक्षा मेें 161 विद्यार्थियों का चयन हुआ जिससे बेहद खुशी हुई और अगले वर्ष के लिए प्लानिंग शुरु की गई ताकि अधिक से अधिक छात्रों का चयन हो सके।
    संगीत के शौकीन वर्मा की वाणी भी मधुर है और जब वे अपने फंक्शन में गाते हैं तो छात्र भी उनका साथ देने लगते हैं। अपनी टीम के हर व्यक्ति को सम्मान देने वाले, सभी को साथ लेकर चलने वाले और सादा जीवन उच्च विचार के समर्थक रेजोनेंस के प्रबंध निदेशक आर के वर्मा का मानना है कि मेहनत वह सुनहरी चाबी है जो भाग्य के द्वार खोल देती है और सफलता के लिए कोई शॉर्ट कट नहीं होता है इसलिए जो भी काम करो, दिल लगाकर और सकारात्मक सोच के साथ पूरी तरह डूब कर करो, सफलता अवश्य मिलेगी। पंडित जवाहरलाल नेहरू को अपना आदर्श मानने वाले आर के वर्मा आज अपने संस्थान रेजोनेंस से संतुष्ट हैं जहां प्रतिवर्ष देश भर से आनेवाले हजारों विद्यार्थियों को आईआईटी जेईई, एआईईईई एवं एआई पीमएटी के लिए मार्गदर्शन दिया जा रहा हैं। आज के यही छात्र कल का भविष्य हैं। संस्थान में दूरस्थ शिक्षा विभाग है जो दूर दराज के छात्रों को मार्गदर्शन देता है, प्री फाउंडेशन करियर प्रोग्राम के साथ ऑनलाइन क्लासेज आयोजित की जाती हैं। आर के वर्मा द्वारा वर्ष 2001 मेें रेजोनेंस के नाम से लगाया गया छोटा सा पौधा आज एक वट वृक्ष बन गया है जिसकी शाखाएं देश भर में फैली हैं। विगत 10 वर्षों में रेजोनेंस से आईआईटी जेईई में 6928 छात्र सफल हुए हैं जो आज देश भर के अनेक संस्थानों में कार्यरत हैं।
    संस्थान के 850 से अधिक आईआईटीयन, बीटेक होल्डर, एनआईटीज, पीएचडीज, एमएससी फैकल्टी एवं उच्च शिक्षित शैक्षणिक कर्मी अपने कठिन परिश्रम से छात्रों की सफलता के लिए प्रयासरत रहते हैें। कठोर परिश्रम में विश्वास करने वाले वर्मा अपनी सफलता का श्रेय माता पिता, पत्नी, बच्चे, बहनेें एवं अपने शुभचिंतकों को देते हुए कहते हैं कि यह सफलता इन सभी के त्याग के बिना संभव नहीं थी। गरीबी को उन्होंने नजदीक से देखा है और प्रतिभावान छात्र कोचिंग से पैसों के अभाव में वंचित न रह जाएं, इसलिए प्रतिवर्ष संस्थान से छात्रों को स्कॉलरशिप एवं नि:शुल्क कोचिंग भी दी जाती है।

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