पुष्य नक्षत्र से जुडी रोचक बातें | Facts-about-Pushya-Nakshatra-in-Hindi

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    pushya nakshtra
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    नक्षत्रों का राजा : पुष्य नक्षत्र
    सत्ताइस नक्षत्रों में आठवां नक्षत्र पुष्य को माना जाता है, सभी नक्षत्रों में सबसे उत्तम और अतिशुभ नक्षत्र पुष्य का अर्थ है पोषण करने वाला, ऊर्जा और शक्ति प्रदान करने वाला। मान्यता है कि पुष्य, पुष्प से ही बना है जिसका अर्थ होता है शुभ, सुंदर और सुख संपदा देने वाला। पुष्य को फू ल की तरह खिलने वाला नक्षत्र माना गया है और एक ताजे खिले हुए पुष्प की ही भांति पुष्य नक्षत्र के दौरान जो तरंगे निकलती है वो मनुष्य के अंदर और उसे आस-पास के वातावरण में बेहद मजबूत सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करती हैं। जिसके कारण जातक का हर काम सफ लता के साथ पूर्ण होता है और इसलिए पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा गया है।

    ज्योतिषिय आधार::
    पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि ग्रह होता है। ज्योतिषशास्त्र में भी पुष्य नक्षत्र को बेहद शुभ माना गया है। वार और पुष्य नक्षत्र के संयोग से रवि.पुष्य जैसे शुभ योग का निर्माण होता है। इस नक्षत्र में जिसका जन्म होता है वे दूसरों की भलाई के लिए सदैव तत्पर रहते हैं, इन्हें दूसरों की सेवा और मदद करना अच्छा लगता है और ऐसे व्यक्ति अपनी मेहनत और लगन से जीवन में आगे बढ़ते हैं।

    इसके अलावा किसी भी नए सामान की खरीदारी, सोना, चांदी की खरीदारी के लिए पुष्य नक्षत्र को सबसे पवित्र माना जाता है। पुष्य नक्षत्र में की गई खरीदारी और शुरू किए गए व्यापार में सदैव बरकत होती है, अपार धन की प्राप्ति होती है। क्योंकि पुष्य नक्षत्र के दौरान धन के देवता चंद्रमा हमेशा अपनी राशि कर्क में रहते हैं और धन का प्रबल योग बनाते हैं।

    शास्त्रों में पुष्य नक्षत्र में पूजा कर पुण्य कमाने के तीन प्रावाधान बताए गए हैं। इसमें सबसे पहली विधि फू लों के द्वारा संपन्न होती है जिसमें कुछ खास फू लों की मदद से जातक पुष्य नक्षत्र के शुभ फ ल का लाभ उठा सकते हैं ठीक उसी तरह पुष्य नक्षत्र में शिव-पार्वती, इंद्र और बाबा भैरव की पूजा से धन.संपत्ति, वैभव और सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है। इतना ही नहीं पुष्य नक्षत्र के दौरान ग्रहों, से जुड़े कुछ खास विधि.विधान को करके आप अपने जीवन को सदा के लिए भय मुक्त बना सकते हैं।

    पुष्य नक्षत्र में जन्में व्यक्ति:
    पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि ग्रह होता है। शनि के प्रभाव से इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव व व्यवहार कैसा होता है आइये जानें-
    ज्योतिषशास्त्र में पुष्य नक्षत्र को बहुत ही शुभ माना गया है। वार एवं पुष्य नक्षत्र के संयोग से रवि.पुष्य जैसे शुभ योग का निर्माण होता है। इस नक्षत्र में जिसका जन्म होता है वे दूसरों की भलाई के लिए सदैव तत्पर रहते हैं,इन्हें दूसरों की सेवा एवं मदद करना अच्छा लगता है।। इन नक्षत्र के जातक को बाल्यावस्था में काफ ी मुश्किलों एवं कठिनाईयों से गुजरना पड़ता है। कम उम्र में ही विभिन्न परेशानियों एवं कठिनाईयों से गुजरने के कारण युवावस्था में कदम रखते रखते परिपक्व हो जाते हैं।

    इस नक्षत्र के जातक मेहनत और परिश्रम से कभी पीछे नहीं हटते और अपने काम में लगन पूर्वक जुटे रहते हैं । ये अध्यात्म में काफ ी गहरी रूचि रखते हैं और ईश्वर भक्त होते हैं। इनके स्वभाव की एक बड़ी विशेषता है कि ये चंचल मन के होते हैं। ये अपने से विपरीत लिंग वाले व्यक्ति के प्रति काफ ी लगाव व प्रेम रखते हैं। ये यात्रा और भ्रमण के शौकीन होते हैं। ये अपनी मेहनत से जीवन में धीरे.धीरे तरक्की करते जाते हैं।

    पुष्य नक्षत्र में पैदा लेने वाले व्यक्ति अपनी मेहनत और लगन से जीवन में आगे बढ़ते हैं। ये मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति होते हैं। ये गैर जरूरी चीज़ों में
    धन खर्च नहीं करते हैं, धन खर्च करने से पहले काफ ी सोच-विचार करने के बाद ही कोई निर्णय लेते हैं। ये व्यवस्थित और संयमित जीवन के अनुयायी होते हैं। अगर इनसे किसी को मदद चाहिए होता है तो जैसा व्यक्ति होता है उसके अनुसार उसके लिए तैयार रहते हैं और व्यक्तिगत लाभ की परवाह नहीं करते।

    ये अपने जीवन में सत्य और न्याय को महत्वपूर्ण स्थान देते हैं । ये किसी भी दशा में सत्य से हटना नही चाहते अगर किसी कारणवश इन्हें सत्य से हटना पड़ता है तो ये उदास और खिन्न रहते हैं। ये आलस्य को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते व एक स्थान पर टिक कर रहना पसंद नहीं करते।

    शुभ फलदायी होता है पुष्य नक्षत्र:

    माना जाता है कि पुष्य नक्षत्र की साक्षी से किये गये कार्य सर्वथा सफ ल होते हैं। पुष्य नक्षत्र का स्वामी गुरु हैं। ऋ ग्वेद में पुष्य नक्षत्र को मंगल कर्ता और सुख समृद्धि दाता कहा गया है। लेकिन यह भी ध्यान दें कि पुष्य नक्षत्र में विवाह सर्वथा वर्जित तथा अभिशापित है। अत: पुष्य नक्षत्र में विवाह कभी भी नहीं करना चाहिए। इस संयोग में भूमि, भवन, वाहन व ज्वेलरी आदि की खरीद फ रोख्त व अन्य शुभ, महत्वपूर्ण कार्यो के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

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