श्रीनाथजी की पावनधरा नाथद्वारा से 3 किमी. दूर ऊपर की ओडऩ स्थित मिराज ग्रुप देश-विदेश में अपनी एक पहचान बना चुका है। इस संस्थान के संस्थापक एवं मुख्य प्रबन्ध निदेशक श्री मदन पालीवाल हैं। श्री मदन पालीवाल सितारों को छूने का हौसला रखते हैं और अभी भी अपने जीवन में विश्राम को स्थान नहीं दे पाये हैं।
श्री पालीवाल के पिता का नाम श्री दीपचंद पालीवाल है। आपकी माता श्रीमती भागवती देवी है। आपकी पत्नी श्रीमती सुशीला एवं आपकी चार पुत्रियां भावना, गरिमा, ममता, माधवी एवं एक पुत्र मंत्रराज पालीवाल हैं।
प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् आपने कला संकाय में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। साथ ही 9 वीं कक्षा से आत्मनिर्भर बनने हेतु प्रयासरत रहे। आपने अपने करियर की शुरूआत शिक्षा विभाग (राजस्थान सरकार) के माध्यम से की। इसके समानांतर आपने अपने क्षेत्र विशेष में विभिन्न व्यवसायों को स्थापित करने के लिए प्रयास किये पर परिणाम शून्य रहा। कर्म के प्रति झुकाव या लगाव के बारे में श्री पालीवाल का कहना है कि बचपन से ही कई प्रकार के कार्य सफलता के लिए जीवन को कई बार दांव पर लगाया यह जानते हुए भी कि जान है तो जहान है, पर इसकी कभी परवाह नहीं की, ये आपका विश्वास ही था जो आज आपको इस मुकाम पर लाया, इसी विश्वास ने आपको निमित्त मात्र बनकर कार्य करने की प्रेरणा दी।

आपका मानना है कि यदि आप माली बनकर किसी बाग को पल्लवित करते हैं, तो ईश्वर का योगदान भी उसमें सम्मिलित होता है परंतु मालिक बनने से करूणा एवं दृढ़ विश्वास का अभाव हो जाता है। मिराज उद्योग की स्थापना की यदि चर्चा करें तो नाथद्वारा जैसे छोटे कस्बे में जहां व्यावसायिक सुविधाओं का अभाव रहा उस स्थान को अपना सर्वस्व मानते हुए जन्म स्थली को ही कर्म स्थली मानते हुए 18 अगस्त 1987 को लघु उद्योग के रूप में मिराज उद्योग की स्थापना की। प्रारंभ में आपने स्वास्थ्य एवं अर्थ जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियों का बड़ी हिम्मत के साथ सामना किया। लोगों के व्यंग्य बाणों का सामना किया एवं व्यंग्य बाणों का सकारात्मक ऊर्जा एवं प्रेरणा में परिवर्तित किया। उस दौर में इस प्रकार का ब्राण्ड बाजार में उपलब्ध नहीं था। आपका मानना है कि गुणवत्ता एवं सुविधायुक्त ब्राण्ड ही ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करता हैं। मिराज में उपरोक्त दोनों कारकों की मौजूदगी के चलते बाजार में इसकी मांग बढ़ती गयी और जिसके चलते आपका नेटवर्क बढ़ता गया। संघर्षरत रहते हुए मिराज उद्योग, मिराज प्रॉडक्ट्स प्रा.लि. में परिवर्तित हो गया। 1996 के पश्चात प्रिंटिंग पे्रस (जर्मनी से आयात मशीन जो प्रतिदिन 3,50,000 रजिस्टर प्रिन्ट करती है), पीवीसी पाईप्स (राजस्थान में एकमात्र यूनिट जो मोल्ड बना कर देती है), रियल एस्टेट, एफएमसीजी प्रोडक्ट्स (चाय, साबुन, माचिस, अगरबत्ती) इत्यादि प्रमुख कम्पनियों की स्थापना की, जो कि अपनी गुणवत्ता से बाजार में अपना वर्चस्व कायम किये हुए हैं। आगामी योजनाओं पर चर्चा के दौरान श्री पालीवाल ने कहा कि- सकारात्मकता के साथ चलने वाले व्यक्ति को लक्ष्यविहीन होना चाहिए। क्योंकि लक्ष्य प्राप्ति के पश्चात् जीवन में ठहराव आ जाता है। आपका मानना है कि पाने के लिए सारा आकाश कम है क्योंकि व्यक्ति अपनी सोच के आधार पर अपने लक्ष्य का निर्माण करता है। लक्ष्य निर्माण के स्थान पर व्यक्ति वर्तमान स्थिति से भूत और भविष्य को सामने रखते हुए अपने आप का आकलन करें तो विचार ऊर्जावान बने रह सकते हैं और आत्ममंथन कर सकता है कि उसके विचार कहां कहां कमजोर रहे या कहां-कहां विचारों की विशालता रही।
राष्ट्र एवं राज्य के समग्र विकास से आपका मानना है कि यदि नागरिक सम्पन्न होता है तो राष्ट्र सम्पन्न होता है। अत: सरकारको इस प्रकार की जन कल्याणकारी योजनाएं बनानी चाहिये जिससे कि प्रत्येक नागरिक का बौद्धिक और आर्थिक विकास हो। आपका मानना है कि सरकार को आयकर के लिए ऐसी नीतियों का निर्माण करना चाहिये जो सभी वर्गों के लिए आकर्षक हो। अर्थात् आय पर न्यूनतम टैक्स हो तो कर चोरी की भयंकर समस्या का समाधान हो सकेगा और राजस्व में उत्तरोत्तर वृद्धि हो सकेगी। साथ ही छोटे करदाताओं को प्रोत्साहित कर उन्हीं के द्वारा समाज तक यह बात पहुंचाने का प्रयास करना चाहिये कि ये राशि राष्ट्र निर्माण में लगती है। आयकर विभाग के विज्ञापनों के बावजूद व्यक्ति प्रेरित नहीं होता अत: व्यक्ति के विचारों में परिवर्तन का नया तरीका स्थापित करना चाहिये। शिक्षा के प्रति दृष्टिकोण है कि शिक्षा केवल आजीविका का साधन मात्र नहीं होना चाहिये, शिक्षा सही अर्थों में व्यक्ति के बौद्धिक विकास के लिए आवश्यक है।

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