महापुरुषों के जिंदगी से जुड़े अनमोल वचन

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– शिक्षण का कार्य कोई स्वतंत्र तत्व उत्पन्न करना नहीं है, सुप्त तत्व को जाग्रत करना है। – विनोबा
– सदाचार और निर्मल जीवन सच्ची शिक्षा का आधार है। – महात्मा गांधी
– मनुष्य में जो संपूर्णता गुप्त रूप से विद्यमान है उसे प्रत्यक्ष करना ही शिक्षा का कार्य है। – स्वामी विवेकानंद
– शिक्षा का महान उद्देश्य ज्ञान नहीं, कर्म है। – हर्बर्ट स्पेंसर
– शिक्षा जीवन की परिस्थितियों का सामना करने की योग्यता का नाम है। – डॉ. जान जी. हिबन

– ज्ञान का निरादर अपने ही मस्तिष्क का अपमान है। – निराला
– ज्ञान का ध्येय सत्य है, और सत्य आत्मा की भूख है। – लेसिंग
– ज्ञान का सार यह है कि ज्ञान रहते उसका प्रयोग करना चाहिए और उसके अभाव में अपनी अज्ञानता स्वीकार कर लेनी चाहिए। – कन्फ्यूशियस
– फल त्याग का यह अर्थ भी नहीं है कि परिणाम के संबंध में लापरवाही रहे। परिणाम और साधन का विचार और उसका ज्ञान अत्यावश्यक है। – महात्मा गांधी
– परिपूर्णता धीरे-धीरे प्राप्त होती है, उसको समय की आवश्यकता होती है। – वाल्टेयर
– मानव की परिपूर्णता अपनी अपूर्णता को जान लेने में है। – ऑगस्टाइन
– परिवर्तन ही सृष्टि है, जीवन है। स्थिर होना मृत्यु है। निश्चेष्ट शांति मरण है। प्रकृति क्रियाशील है। – जयशंकर प्रसाद
– जीवन में शारीरिक और मानसिक परिश्रम के बिना कोई फल नहीं मिलता। दृढ़चित्त और महान उद्देश्य वाला मनुष्य जो करना चाहे सो कर सकता है। – ऐरी शेफर
– मुस्कान और आंसू के मध्य मानव! तू एक गतिशील यंत्र है। – बायरन
– प्रत्येक व्यक्ति एक महान गं्रथ है, यदि आप उसे पढऩा जानते हैं। – चैनिंग
– मनुष्य सृष्टिकर्ता के प्रतिबिंब में ईश्वरतुल्य कार्य के लिए बनाया गया है। – डिजरायली
– मनुष्य की दशा उस घड़ी के समान है जो ठीक तरह से रखी जाए तो सौ वर्ष तक काम दे सकती है और लापरवाही से बरती जाए तो जल्दी बिगड़ जाती है। – स्वेट मार्डेन
– मनुष्य का जन्म दुर्लभ है, उसका एक क्षण भी अमूल्य है। तो भी बड़ा आश्चर्य है कि मनुष्य कौडिय़ों के समान उसका व्यय करते हैं। – अज्ञात
– विज्ञान को विज्ञान तभी कह सकते हैं जब वह शरीर, मन और आत्मा की भूख मिटाने की पूरी ता$कत रखता हो। – महात्मा गांधी
– विज्ञान और कला का संबंध समस्त विश्व से है और उनके आगे राष्ट्रीयता की सीमाएं लोप हो जाती हैं। – गेटे
– पौराणिक कथाओं के पुराने आश्चर्य से भी विज्ञान आगे बढ़ गया है। – एमर्सन
– विज्ञान ने अंधों को आंख दी है और बहरों को सुनने की शक्ति। उसने जीवन को दीर्घ बना दिया है, भय को कम कर दिया है। उसने पागलपन को वश में कर लिया है और रोग को रौंद डाला है। – आर्केडिकन फरार

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