क्या है रैनसम वेयर ?

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मालवेयर से अलग है रैन्समवेयर—

कई मालवेयर, जिन्हें हम अक्सर वायरस कहते हैं, आपके कम्प्यूटर में गलत तरीके से घुस जाते हैं। अक्सर इनका उद्देश्य या तो आपके कम्प्यूटर के डाटा को चुराना होता है या फिर उसे मिटाना। लेकिन रैन्समवेयर आपके सिस्टम में आकर आपके डेटा को ‘इनक्रिप्ट’ यानी लॉक कर देता है। यूजर तब तक इसमें मौजूद डेटा तक नहीं पहुंच पाता जब तक कि वह इसे ‘अनलॉक’ करने के लिए रैनसम यानी फिरौती नहीं देता। ये मालवेयर ईमेल के जरिए फैलता है।

-इसमें डेटा एक्सफिल्ट्रेशन की भी कैपबिल्टी होती है, जिसके जरिए हैकर्स यूजरनेम, पासवर्ड, इमेल को आसानी से एक्सेस कर सकते हैं।
-इसे बिना किसी ‘सिक्योरिटी की’ के एनक्रिप्ट नहीं किया जा सकता।
-यह किसी भी तरह से एक्सटेंशन की फाइल को प्रभावित करने में सक्षम है।
-फाइल नेम को अव्यवस्थित कर देता है, कौन सी फाइल इन्फेक्ट हुई है, पता नहीं चल पाता।
-रैंसमवेयर आपके फाइल के एक्सटेंशन को भी चेंज कर देता है, जिससे डेटा ओपन नहीं होता।
-इसकी सबसे खास बात यह होती है कि यह बिटक्वाइन के थ्रू पेमेंट एक्सेप्ट करता है। जिसे अभी तक कोई सिक्योरिटी एजेंसी, साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर्स या एनफोर्समेंट एजेंसीज ट्रैक नहीं कर सकी हैं।
-इसमें पेमेंट के लिए टाइम लिमिट तय होती है, जिसके बाद यह और मजबूत होते जाते हैं। डेडलाइन ओवर होने की कंडीशन में डेटा डिस्ट्रॉय हो जाते हैं।
– नेटवर्क से जुड़े दूसरे कम्प्यूटर तक भी आसानी से पहुंच जाता है, जिससे वह भी कम्प्यूटर इन्फेक्टेड हो जाता है।

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