इंडस्ट्री रेडी करियर हैं ये, करते ही पैसा आना शुरू…

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आज सभी कॅालेज-इन्स्टीट्यूट्स के लिए आवश्यक हो गया है कि वे छात्रों को रेग्युलर कोर्सेज करवाने के साथ साथ उनका प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस भी प्रदान करें ताकि जब वे अपना कोर्स पूरा कर संबंधित इण्डस्ट्री में जाएं तो उन्हें किसी परेशानी का सामना न करना पड़े,बल्कि वे खुद को उसी वातावरण में तुरन्त ढाल लें।
मार्केट सिनेरियो को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि इस माहौल में कोई भी कम्पनी अनुभवहीन को रिक्रूट करने से पहले सोचेगी और यदि सही ट्रेनिंग उसे कॅालेज में अध्ययन के दौरान ही मिल जाती है तो उसकी उम्मीदवारी संबंधित पद के लिए काफी हद तक बढ़ जाती है।कम्पनियों भी उन्हीं कैंडीडेट्स को रिक्रूट करना पसंद करती हैं जिन पर अनावश्यक समय,धन व संसाधनों का व्यय ना करना पड़े, ऐसे में कॅालेज- इन्स्टीट्यूटस द्वारा सुविधाएं मुहैया करवाए जाने से छात्रों के जहां एक ओर ज्ञान में वृद्वि होती है साथ ही उन्हें प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस मिलने से उनकी योग्यता भी बढ़ती है और वे प्रतिस्पर्धा में खुद को दूसरों से आगे पाते हैं। इसके लिए कॅालेज- इन्स्टीट्यूटस अपने यहां के स्टूडेंट्स को अनेक एक्स्ट्रा फेसीलिटीज दे रहे हैं ताकि तुरंत जॉब मिलने में वे खुद को सक्षम पाएं । समय- समय पर संबंधित विषयों पर सेमिनार्स आयोजित किए जाते हैं,ताकि विषय की बारीकियों को समझा जा सके । उन पर इण्डस्ट्री के विख्यात विशेषज्ञों द्वारा दिए गए टिप्स निश्चित तौर पर विधार्थियों की राह सुगम करते हैं । इसके अतिरिक्त छात्रों को पाठ्यक्रम में जो कराया जा रहा है,उन्हीं विषयों से संबंधित जाने-माने विशेषज्ञों द्धारा समय- समय पर गेस्ट लेक्चर्स आयोजित कराए जाते हैं।जो छात्रों को अपने अनुभवों के द्वारा लाभान्वित करते हैं । संबंधित विषय में अपने अनुभवों,उस क्षेत्र में नया क्या हो रहा है,यह जानना छात्रों के लिए बेहद कारगर साबित होता है। इसी को महत्तवाकांक्षी युवा आगे अपने करियर में प्रयोगात्मक तरीके से लागू कर सफलता की सीढिय़ां चढ़ते हैं। कॉलेज- इंस्टीट्यूट्स द्वारा स्टूडेंट्स के लिए साइट विजिट आयोजित किए जाते हैं,- जैसे फैक्टरी,मिल्स,प्रॉडक्शन हाउस या कॅापार्रेेट हाउसेज में कार्य- प्रणाली को समझने की प्रक्रिया आदि ।वहां जाकर उन्हें इस बात करा प्रत्यक्ष अनुभव होता है कि उन्हें जो पढ़ाया जा रहा है उसकी वास्तविक प्रोसेसिंग कैसे होती है,इस दौरान वे अपनी जिज्ञासा शांत कर लेते हैं और आगे वलकर ऐसी ही किसी इण्डस्ट्री में जॉब पाने में उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होती।

छात्रों को थ्योरी की कक्षाएं उनके ज्ञान में वृद्धि करती हैं,लेकिन वास्तव में उन्हें संबंधित विषय का ज्ञान कराने के लिए कालेज – इंस्टीटयूटस आज इंडस्ट्रियल विजिट कराते हैं । जिससे वे यह जान सकें कि वे जो ज्ञान अॢजत कर रहे हैं उसका कैसे उपयोग किया जाए । इस प्रकार कालेज-इन्स्टीट्यूटस आदि छात्रों के लिए अध्ययन- प्रशिक्षण के साथ साथ उनके करियर की दिशा-निर्धारण में भी महत्तवपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। चाहे वह करियर काउंसलिंग के माध्यम से हो,सेमिनार्स,गेस्ट लेक्चर्स से हो या इण्डस्ट्री विजिट्स द्वारा । युवाओं को न केवल अपनी प्रतिभा को सही दिशा देने का अवसर मिलता है,बल्कि व्यावहारिक ज्ञान द्वारा वे स्वयं को संबंधित क्षेत्र में शीघ्र स्थापित करने में सफल हो पाते हैं ।

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