होली पर इस तरह बचाएँ जल…. Celebrate Waterless Holi

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eco friendly holi
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Tips for Celebrating an Eco-Friendly Holi

आज भी देश में जल का सर्वाधिक उपयोग लगभग 82 प्रतिशत कृषि कार्यों के लिए किया जाता है, तो साथ ही हमारे देश में हर साल अलग-अलग क्षेत्रों में सूखा पड़ता है, ऐसे में जल संरक्षण के प्रति हमारी जिमेदारी अधिक बढ़ जाती है।

Tips for saving water this Holi :
एक आंकड़े से हम समझ सकते हैं कि आज हमारे पास कितना जल उपलब्ध है। पृथ्वी पर मौजूद कुल जल का ९७.३ प्रतिशत पानी समुद्र में है, जो खारा है और शेष २.७ प्रतिशत मीठा जल है। यह २.७ प्रतिशत जल भी सीधा हमें उपलब्ध नहीं है, इसका ७५.२ फीसदी भाग ध्रुवीय क्षेत्रों में तथा २२.६ फीसदी भूमि जल के रूप में है। बाकी जल का शेष भाग नदियों, झीलों, बायुमंडल तथा नमी के रूप में हरे पेड़-पौधों में उपस्थित है। इस पानी का 60 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा खेती और उद्योग कारखानों में इस्तेमाल होता है और बाकी का हिस्सा हम पीने, भोजन बनाने, नहाने, कपड़े धोने एवं साफ-सफाई में खर्च करते हैं। विश्व की 17 प्रतिशत जनसंया भारत में निवास करती है जबकि हमारे पास विश्व का केवल 4 प्रतिशत नवीकरणीय जल संसाधन मौजूद है। भारत को उन देशों में गिना जाता है, जहां पानी की कमी है और तो और साल 2050 तक हमारी गिनती विश्व के अत्यधिक अभाव ग्रस्त देशों में की जाने लगेगी।
आज होली को जल संरक्षण (Save water on Holi )की दृष्टि से मनाने की आवश्यकता है अर्थात सूखी होली(Dry Holi) या ऐसी होली जिसमें कम से कम जल की बर्बादी हो। जैसे कि होली में सूखे रंगों का अधिक से अधिक उपयोग करें और रंग प्राकृतिक हों क्योंकि प्राकृतिक रंगों को छुड़ाने के लिए अधिक पानी नहीं खर्च करना पड़ता और स्वास्थ्य एवं त्वचा की दृष्टि से भी यह सुरक्षित होते हैं। पानी से होली खेलने का विचार हो तो पानी की एक निश्चित मात्रा निर्धारित कर लें और सबको साथ लेकर उस पानी से खेलें ताकि सब अलग-अलग पानी खर्च न करें। बार-बार पानी से होली खेलने और गुब्बारें में पानी भर के खेलने के लालच से बचें। जब ज्ञात हो जाए कि अब और रंग से नहीं खेलना है, तभी नहाने के लिए जाएं, बार-बार हाथ-मुंह धोने से भी बचें। होली खेलते वक्त पुराने और गहरे रंग के कपड़े पहनें ताकि उन्हें आसानी से धोया जा सके। घर में होली खेलने से बचें, अगर घर में खेल रहें हो तो फर्श पर कुछ बिछाने की व्यवस्था रखें ताकि फर्श गंदा न हो और धोने के लिए पानी न खर्च करना पड़े। इसी तरह की कई छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर हम होली पर होने वाले बेवजह के पानी के नुकसान पर काबू पा सकते हैं।
आज भी देश में जल का सर्वाधिक उपयोग लगभग 82 प्रतिशत कृषि कार्यों के लिए किया जाता है, तो साथ ही हमारे देश में हर साल अलग-अलग क्षेत्रों में सूखा पड़ता है, ऐसे में जल संरक्षण के प्रति हमारी जिम्मेदारी अधिक बढ़ जाती है। होली का आशय संस्कृति से है, वह संस्कृति जो हमें मेलजोल से रहना सिखाती है, वह संस्कृति जो दूसरों के जीवन में रंग भरना सिखाती है और समय के साथ आज होली खेलने के तरीके को भी बदलने की आवश्यकता है, तो आईये इस होली हम प्रण लें कि होली और होली के बाद बाकी 365 दिन भी अधिक से अधिक जल बर्बाद होने से बचाए

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