अगस्त का पहला संडे युवाओं के लिए कुछ खास ही होता है। इस दिन चॉकलेट, कैंडी और फूलों की खुशबू फिजा में कुछ ज्यादा ही महकती है और क्यों न हो, यह दिन दोस्त और दोस्ती का जो होता है। जी हां हम बात कर रहें हैं फैंडशिप-डे की। यू तो दोस्त अपनी दोस्ती का इजहार करने के लिए किसी खास दिन के मोहताज नहीं होते, लेकिन फिर भी यह दिन उनके लिए कुछ ज्यादा ही अहमियत रखता है। इस दिन का उत्साह बच्चों से लेकर युवाओं तक देखने को मिलेगा। यह दिन दोस्तों को फैंडशिप बैंड बांधकर यह अहसास कराने को होता है कि वो उनकी जिदंगी में कितने खास है। वो दिन अब दूर नहीं जब एक दोस्त अपनी दोस्ती का इजहार फैंडशिप बैंड बांधकर करेंगे। इस दिन फैंडशिप बैंड बांधकर नए दोस्त बनाए जाते हैं और पुरानी दोस्ती को कायम रखने का संकल्प लेते हैं। इस दिन का इंतजार युवाओं में खासा देखने को मिलता है। साल में एक दिन होता जिसमें युवा अपने दिल की बात एक-दूसरे के सामने दोस्ती के प्रस्ताव के रूप में रखते हैं। दोस्त लडक़ा-लडक़ा भी हो सकता या लडक़ी-लडक़ा भी। फैंडशिप -डे मनाने के यूं तो सबका अपना अपना अंदाज होता है, लेकिन फैंडशिप -डे की शुरूआत एक धागा बांधकर की जाती है। कई दोस्त तो इस दिन की शुरूआत ही फूलों के आदान-प्रदान के साथ करते हैं। इस दिन स्कूलों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, पार्क और पर्यटक स्थलों पर खासी भीड़ होती है। यहीं वे स्थान होते हैं जहां पर दोस्ती का इजहार किया जा सकता है। बच्चों के साथ-साथ शिक्षक भी इसमें भाग लेते हैं। धीरे-धीरे यह पाश्यात सभ्यता परंपरा का रूप धारण कर रही है। इस दिन की तैयारी काफी पहले से ही कर ली जाती है।

बदलते समय के साथ बदल रहे है उत्सव और त्यौहार। युवाओं का पाश्चात्य सभ्यता की तरफ बढता आकर्षण इन नए उत्सवों को बढावा दे रहा है। 14 फरवरी को वैलेंटाइन-डे और अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाने वाला फैंडशिप -डे युवाओं के लिए आज दिपावली या होली से ज्यादा महत्व रखते हैं। अगस्त का महीना शुरू होने को है इसी कारण फैंडशिप -डे को लेकर युवाओं में उत्साह देखते ही बनता है। फैंडशिप -डे मनाने के यूं तो सबका अपना-अपना तरीका है, लेकिन फैंडशिप डे की शुरुआत फैंडशिप बैंड के साथ ही की जाती है। इस दिन युवा अपनी दोस्ती का इजहार दोस्त की कलाई पर फैंडशिप बैंड बांधकर करते है। हालांकि ये एक पाश्चात्य त्यौहार है लेकिन इस बार भारतीय सावन के महीने में आने के कारण इस त्यौहार का अपना अलग ही मजा है। फूलों के आदान-प्रदान के साथ इस दिन की शुरुआत होती है, जो बैंड और कार्ड परम्परा को प्रतिनिधित्व करते हुए अपने चरम पर पहुंचती है। क्लबों और होटलों में भी इस दिन विशेष आयोजन रखा जाता है। जिसमें युवा बढ-चढकर हिस्सा लेते हैं। कई तरह के मेले लगे होते हैं जिनका नजारा देखते ही बनता है। फूलों की खूशबु और चाकलेट की मिठास के साथ इस त्यौहार को मनाने के लिए एक अदद दोस्त की जरुरत है। प्रथम वर्ष के छात्र नरेश ने बताया कि वो इस बार अपना फैंडशिप -डे अपनी कॉलेज की एक छात्रा के साथ मना रहा है। नरेश के अनुसार वक्त के साथ लोगों के बीच पनपी दूरियों को कम करने के लिए इस तरह के उत्सवों का आयोजन समय-समय पर होना चाहिए। कानोडिय़ा कॉलेज में पढऩे वाली छात्रा मोनिता के अनुसार इस बार वह अपना फैंडशिप -डे अपने घर पर अपने परिवार वालों के साथ मनाएंगी। उसके अनुसार उसके सबसे अच्छे मित्र उसके परिवार वाले ही हैं। फैंडशिप डे के लिए बाजार में नई तरह की कार्डों की भरमार है, साथ ही फैंडशिप बैंड की नई रेंज बाजार में उपलब्ध हो गई है।

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