फॉरेन लैंग्वेज में करियर

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आज के वैश्विकरण के दौर में एक दूसरे से संवाद कायम करने के लिए एक से अधिक भाषाएं जानने वालों की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है। भारत जैसे देशों में जो कि पूरी दुनिया में विभिन्न कंपनियों को अपनी सेवाएं दे रहा है, ऐसे लोगों की बहुत जरूरत है। किसी भी एक भाषा में दक्षता हासिल अच्छे जॉब में सहायक हो सकती है। अगर किसी फॉरेन लैंग्वेज का ज्ञान हो तो करियर की दौड़ में यह आपको भीड़ से बहुत आगे निकाल देता है।
किसी नए अनजान देश या प्रदेश में जाने पर आपकी पहली समस्या संवाद यानी की आती है। स्थानीय लोगों से बातचीत और काम के बीच संबंध स्थापित करने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। एक समूह या कंपनी के स्तर पर भी ये समस्या वैसे ही बनी रहती है, जिसका एक ही इलाज है- उस स्थान विशेष की भाषा का ज्ञान। ऐसे में वैश्विकरण, भौगोलिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक दूरियों को कम करने के लिए विदेशी भाषा के जानकारों की मांग उतनी ही तेजी से बढ़ती जा रही है।

कहां हैं अवसर?
एक या दो विदेशी भाषाओं पर गहरी पकड़ बनाने के बाद आप मनोरंजन, टूरिज्म, एविएशन, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों, दूतावास, डिप्लोमैटिक सर्विस, पत्रकारिता एवं जनसंपर्क, शिक्षण संस्थान, प्रकाशन संस्थान और बीपीओ वगैरह के क्षेत्र में करियर की शुरुआत कर सकते हैं। यहां आप बतौर अनुवादक, दुभाषिया, कंटेट राइटर्स, ट्रांसक्रिप्टर आदि काम कर सकते हैं। आप चाहें तो अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए इसे पार्ट टाइम जॉब के तौर पर भी अपना सकते हैं।

विभिन्न कोर्स
अगर आपमें योग्यता है तो कुछ ऐसे कोर्स भी हैं जो आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं। फॉरेन लैंग्वेज में मुख्यत: तीन प्रकार के कोर्स उपलब्ध हैं- सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री कोर्सेस। सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और एडवांस डिप्लोमा पार्ट टाइम कोर्स हैं और कई विश्वविद्यालयों और प्राइवेट संस्थानों द्वारा करवाए जाते हैं। सर्टिफिकेट कोर्स के लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं होती है, जबकि डिप्लोमा के लिए उस भाषा में सर्टिफिकेट जरूरी होता है। इंटिग्रेटिड मास्टर कोर्स (पांच वर्षीय) को होता है, जिसके लिए ग्रेजुएट होना जरूरी है। इसके अलावा आप विदेशी भाषा में स्नातकोत्तर डिग्री, एम फिल और पीएचडी भी कर सकते हैं।

इन भाषाओं की है मांग
विदेशी भाषाओं में चाइनीज, जापानी, स्पेनिश, फ्रेंच, जर्मन, रशियन, कोरियन, अरेबिक और इटैलियन भाषा की ज्यादा मांग हैं।

संभावनाएं
विदेशी भाषा सीखने के बाद आप ट्रांसलेटर या इन्टरप्रेटर के रूप में फ्रीलांस तो काम कर ही सकते हैं साथ ही बहुरराष्ट्रीय कंपनियों, सरकारी विभागों, दूतावासों आदि में स्थायी नौकरी भी प्राप्त कर सकते हैं। यूएनओ, वल्र्ड बैंक, यूनिसेफ जैसे अंतरराष्ट्रीय सगठनों में भी लैंग्वेज एक्सपट्र्स के लिए काफी जॉब्स हैं। इसके अलावा पर्यटन और होटल इंडस्ट्री में भी अनगिनत अवसर है। अनुवादक का काम पब्लिशिंग हाउस, रिसर्च, सरकारी संस्थानों, विदेश मंत्रालय और दूतावासों में होता है। इसके अलावा भारत में अभी लैंग्वेज टीचर्स की भारी कमी है, चाहे वो प्राइवेट संस्थान हों या सरकारी कॉलेज और यूनिवर्सिटीज, जिसके लिए भारी संख्या में शिक्षकों की आवश्यकता होगी। अगर आंकड़ों की मानें तो अगले साल यानी 2010 के अंत तक दिल्ली में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में विदेशी भाषा के जानकारों के लिए अच्छी संभावनाएं हैं।

आमदनी
यहां कमाई को कोई निश्चित सीमा नहीं है। क्योंकि यह काम के स्वरूप और जगह पर निर्भर है। बतौर अनुवादक आपको 100-150 रुपए प्रति पेज और बतौर दुभाषिया 200-500 रुपए प्रति घंटे कमा सकते हैं। एक अच्छा दुभाषिया 2-4 हजार रुपए प्रति घंटा तक भी कमा सकता है। हालांकि यहां यह ध्यान रखना जरुरी है कि किसी भाषा पर अपनी पकड़ बनाने के लिए कड़ी मेहनत, अध्ययन और निरंतर अभ्यास की जरूरत होती है। इसीलिए यहां तक पहुंचने के लिए धैर्य और निरंतरता बेहद जरूरी है।

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