फैशन- फ्यूज़न, मिक्स एण्ड मैच का ज़माना Fashion Clothing Tips & Tricks

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आज फैशन है फ्यूज़न और मिक्स एण्ड मैच की, चाहे बात ट्रेडीशनल या मॉडर्न ड्रैसेस की हो, ड्रैस मटिरियल, डिज़ाइनिंग और स्टिचिंग की हो या फिर असेसरीज़ की।  फैशन- फ्यूज़न, मिक्स एण्ड मैच का ज़माना जी हां, आज आप कैसे भी कपड़े या असेसरीज़ चुनें या पसंद करें, उनमें आपको आधुनिक समय की फैशन और पारंपरिक परिधानों का संगम देखने को मिलेगा। यूजन के इस दौर ने हमारे पहनावे पर भी असर डाला है। जहां एक तरफ पारंपरिक परिधानों में भी आधुनिकता का पुट देखने को मिलता है वहीं मॉडर्न ड्रैसेस में भी पारंपरिक व एथनिक लुक खूब पसंद किया जा रहा है।

फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर देखा जाए तो यही सबसे बेहतरीन दौर है जिसमें आप जो भी पहनें, माडर्न ट्रैंड को अपनाएं या पुराने समय के चलन को, आप ट्रैंडी और फैशनेबल ही कहलाएंगे। बस ज़रूरत है कि आप अपनी पर्सनेलिटी को समझकर उसके अनुरूप डै्रस और स्टाइल चुनें। आप जो भी पहनें वह आप खिलना चाहिए और आपकी पर्सनेलिटी को सूट करना चाहिए। फिर देखिए यह यूज़न फैशन कैसे आपकी शान में चार चांद लगाकर आपको सभी की नज़रों में स्टाइल आईकन बना देगा।

अपनी पसंद और पर्सनेलिटी की जानकारी आपके अतिरिक्त और किसी को इतने बेहतर तरीके से नहीं हो सकती तो इसका फायदा उठाएं और खुद अपने फैशन डिज़ाईनर बनिए। इस यूज़न फैशन की यही खास बात है कि यह फैशन के दायरे सीमित नहीं करता। आप चाहे तो हमेशा प्रयोग करती रहें और अपनी पसंद व स्टाइल के अनुसार खुद कुछ भी नया ट्राय कर सकती हैं क्योंकि नये जमाने और युवा पीढ़ी को किसी भी प्रकार के तंग दायरों में बंधकर रहना पसंद नहीं है। उन्हें नित नये प्रयोग करना और स्टाइल स्टेटमेंट्स बदलते रहने पसंद है। वैसे ही जीवन का दूसरा नाम ही बदलाव है, हमें हमेशा कुछ डिफरेंट और नये की ओर बढ़ते रहना चाहिए नहीं तो जीवन में बोरियत हो जाती है फिर चाहे ड्रैस की बात हो या किसी काम की।

Fashion Clothing Tips & Tricks फैशन- फ्यूज़न, मिक्स एण्ड मैच का ज़माना

बस इसी फंडे को अपना रहे हैं आज के युवा और इसीलिए पुराने समय की फैशन जैसे लॉंग स्कर्ट, ए कट शॉर्ट कुर्ता व अनारकली स्टाइल कुर्ता, प्रिंटेड व एंब्रोइडेड सैटिन और कॉटन शर्ट्स आदि बड़े ही चाव के साथ ट्यूब व स्लीवलैस टाप्स, लैगिंग व सैरोंग और लो वेस्ट जींस जैसे मॉडर्न आउटफिट्स के साथ मिक्स एण्ड मैच कर पहने जा रहे हैं।

इस फ्यूजन ने काफी सुविधाजनक एवं स्टाइलिश डै्रसिंग को जन्म दिया है मिसाल के तौर पर जरूरी नहीं कि आप जींस पर टॉप ही पहनें, वैसे तो टॉप में कई वैरायटी व डिज़ाइन मिल जाएंगे जैसे ऑफ शोल्डर, स्लीवलैस, ट्यूब टॉप, स्ट्रैचेबल, पोलो नैक आदि लेकिन आप चाहें तो जींस के साथ शर्ट, कुर्ती, शॉर्ट कुर्ता, टी शर्ट या फिर ट्यूनिक या छोटी फ्रॉक भी पहन सकते हैं। इतने स्टाइल एवं वैरायटी किसी भी दौर में उपलब्ध नहीं थी। और सुविधा की बात करें तो कोई जवाब ही नहीं क्योंकि जब आपके पास इतनी च्वाइस है तो आप अपनी पसंद के अनुसार अपनी सुविधा को देखते हुए ड्रैस सलेक्ट कर सकते हैं।

अगर आपको मॉडर्न एवं शॉर्ट आउटफिट्स पसंद है और आपका फिगर पतला दुबला है तो शॉर्ट टॉप्स, स्फैगिटी एवं ट्यूब टॉप्स पहनी सकती हैं वहीं अगर थोड़ा भरा हुआ शरीर है तो आप टाइट व स्ट्रैचिंग टॉप्स, शॉर्ट कुर्ता व लैगिंग या कुर्ती पैटर्न ट्राई कर सकती है और लोवर्स में जींस, लॉंग स्कर्ट, केप्रीज़, सेरोंग आदि पहन सकती हैं। इसी तरह असेसरीज में भी कोई फिक्स ट्रैंड या निर्धारित मानक नहीं है सभी कुछ मिक्स एण्ड मैच की तर्ज पर ही चल रहा है। ज्वैलरी में इन दिनों पारंपरिक गोल्ड के स्थान पर सिल्वर एवं प्लेटिनम जो फ्यूजन को अधिक इंगित करते हैं, उन्हें ज्यादा पसंद किया जा रहा है साथ डेलिकेट के साथ बोल्ड लुक देने के उद्देश्य से भी इसकी अधिक मांग है। इन दिनों ब्यूटी विद बोल्डनैस को ज्यादा महत्व दिया जाता है और फ्यूजन कल्चर इसी का उदाहरण है।
इन दिनों ड्रैस मटिरियल में भी वापस ट्रेडिशनल डिज़ाइन्स एवं हैंडलूम कपड़ों जैसे बाटिक, सांगानेरी, बगरू प्रिंट, खादी, टाई एण्ड डाई, चिकन आदि की काफी डिमांड है और तो और ये कपड़े विदेशों में निर्यात किये जा रहे हैं। इस आधुनिकता एवं परंपरा के बेजोड़ संगम से फैशन जगत में एक नये युग की शुरूआत हुई है और इसकी खास बात यह है कि यह कुछ लोगों तक सीमित नहीं है बल्कि इसका प्रभाव आम लोगों तक पहुंचा है और वे भी इस दौर के साथ चलते हुए इस यूज़न फैशन के खूबसूरत स्टाइल्स एवं जलवों को भलिभांति सीख रहे हैं।
कॉलेज छात्रा पायल का कहना है कि आजकल सभी चीजों में फ्यूजन देखने को मिलता है चाहे हम खाने पीने की बात करें या फिर पहनावे की। अगर संस्कृति को भी देखा जाए तो पूरी तरह भारतीय संस्कृति के अनुरूप कौन चल रहा है और तो और अब तो पढ़ाई लिखाई में भी हम दूसरे कल्चर और तरीके अपना रहे हैं। और अगर जब हम वैश्वीकरण की बात करते हैं तो फिर पूरा विश्व एक समान हो जाता है, इसीलिए यह हमारे लिए खुशी की बात है कि आज हम इस प्रकार के जीने के आदि होते जा रहे हैं जहां किसी एक चीज की बंदिश नहीं है। यह अधिक सुविधाजनक है और आने वाले समय में बढ़ती महंगाई व अनेक समस्याओं के दौर में अधिक अनुकूल भी होगा।
कुछ ऐसे ही विचार है सौरभ जैन के जो कि प्राइवेट कंपनी में कार्य करते हैं। साहिल का मानना है कि फैशन वह होनी चाहिए जो कि हमारे लिए आरामदायक हो और हम पर फबे। फैशन के नाम पर कुछ भी बेढंगा या बेतरतीब पहन लेना कोई अकलमंदी नहीं है। एक तरह से फ्यूजन कल्चर ने फैशन के लिए बनी हमारी संकुचित धारणा को मिटाने का काम किया है। आज इस दौर या कल्चर में हम हमें जो अच्छा लगता है वह पहन सकते हैं और कोई उस पर कमेंट भी नहीं कर सकता है। यह आजादी मिली है हमें इस फ्यूजन कल्चर से और यही कारण है कि इसकी अधिक चर्चा है और सभी लोगों को यह पसंद आ रहा है।

हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि यह कल्चर हमें सिस्टमेटिक फैशन से दूर ले जा रहा है और लोग फ्यूजन कल्चर के नाम पर कुछ भी अजोड़ बजोड़ पहन कर यह साबित करते हैं कि वे फैशन गुरू हैं। यह भी तर्क दिया जाता है कि इस कल्चर ने हमारे पारंपरिक परिधानों के साथ भी नाइंसाफी की है। साड़ी व सलवार सूट को भी आज के दौर में इस तरह अजोड़ बजोड़ तरीके से पहना जा रहा है कि उनकी गरिमा को ठेस पहुंच रही है और कई पारंपरिक कपड़ों जैसे गांधी की खादी या हैदराबाद की शान चिकन को इस तरह डिज़ाइन करके पहना जाता है कि शर्म आ जाए।

अलग अलग लोग, अलग अलग विचार लेकिन इसमें कोई दोराय नहीं कि अगर पर्सनेलिटी के अनुरूप फबते हुए कपड़े पहने जाएं और परंपरा व आधुुनिकता का संगम सही तरीके से किया जाए तो निश्ििचत रूप से फ्यूजन कल्चर ने हमारी सोच व फैशन के दायरे बढ़ाएं है और आम आदमी को भी आज़ादी दी है कि वह अपनी पसंद व पर्सनेलिटी के अनुसार ड्रैस हो सके।

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