आई चैकअप खास सलाह

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ढाई साल की उम्र में करवाएं आई चैकअप:-

बच्चों में मंद-दृष्टि और भेंगेपन की समस्या जन्म से विकसित होती है। लेकिन इन बीमारियों को ढाई साल की उम्र में ही डायग्नोस किया जा सकता है। इस उम्र में पेरेंट्स बच्चे का पहला आई चैकअप करवाकर इस बीमारी को डायग्नोस करवा सकते हैं। बच्चों में विजुअल सिस्टम जन्म के पहले साल से लेकर सातवें साल तक परिपक्व होता है। इस उम्र में जो समस्या होती है वो जिंदगी भर के लिए डवलप हो जाती है। भेंगेपन के कारण बच्चों में विजन पावर नहीं के समान होती है। सही उम्र में विजन पावर डायग्नोस नहीं होने पर उम्र भर इसका इलाज नहीं हो पाता है।
प्रिवेंशन-भेंगेपन से बच्चों को बचाने के लिए दो से ढाई साल की उम्र में जब बच्चा स्कूल जाना शुरू करे उससे पहले पहला आई चैकअप करवाएं।
भेंगेपन का इलाज : सही उम्र में बच्चे को चश्मा लगवाएं। सर्जरी की जा सकती है।
पैचिंग थैरेपी में पेंशेंट के विजन को मद्देनजर रखते हुए कई घंटों से लेकर कई दिनों तक आंखों पर पैच लगवाकर बंद करवाई जाती हैं।
कारण: येआनुवांशिक या फिर प्राकृतिक दोनों तरीके से बच्चों में डवलप होता है। इस बीमारी का इलाज ३ वर्ष की उम्र से ही कर देना चाहिए।
एंबलोपिया या भेंगेपन की समस्या से कई बार रोगी में अवसाद या आत्मबल की कमी होने लगती है, क्योंकि समाज में उनका मजाक बनने से उनमें सेल्फ कॉन्फिडेंस कमी हो जाती है। वे हीन भावना से ग्रस्त हो सकते हैं।
भेंगेपन से जुड़े मिथ : बच्चे के बड़े होने के साथ दूर हो जाएगी। जबकि ५ वर्ष की उम्र तक इसका इलाज होने पर भेंगापन बच्चे में पूरी तरह से विकसित हो जाता है।

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