डेंगू – लक्षण, बचाव और नेचुरोपैथी,एलोपैथी,आयुर्वेद इलाज

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डेंगू वायरस जनित बीमारी है। यह एडीज मच्छर से फैलता है। डेंगू में लापरवाही बरतना कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसमें सर्दी लगकर 104 डिग्री तक बुखार आता है। तीसरे दिन शरीर पर दाना आना शुरू हो जाते हैं। तीन से पांच दिन तक फीवर रहता है। लेकिन कई केसों में फीवर उतरने के साथ प्लेटलेट्स कम होना शुरू हो जाती हैं। ब्लीडिंग डिसऑर्डर होने पर नाक और पेट से ब्लीडिंग होती है। प्लेटलेट्स कम होने पर बॉडी में प्लाज्मा लीक करना शुरू कर देता है। इससे पानी की कमी और खून गाढ़ा होना शुरू होता है।
पेशेंट्स मल्टी ऑर्गेन फेलियर में जा सकता है। पित्त की थैली में सूजन होने से भूख कम होने लगती है। समय पर ठीक नहीं होने से प्लाज्मा लीक होना शुरू हो जाता है। ब्लड प्रेशर गिरने से मल्टी ऑर्गेन फेलियर की समस्या हो सकती है। वायरस के लीवर में जाने से हल्का पीलिया हो सकता है।
डेंगू के प्रकार

क्लासिकल डेगु में तेज बुखार के साथ प्लेटलेट्स कम होती हैं। डेंगू हेमरेजिंग फीवर में बुखार के साथ ब्रेेन हेमरेज होता है। डेंगू शॉक सिंड्रोम में प्लाज्मा लीक करने पर ब्लड प्रेशर गिर जाता है। पेशेंट के शॉक में जाने और समय पर ट्रीटमेंट नहीं मिलने पर डेथ हो सकती है।

पपीते के पत्ते से डेंगू में बढ़ाएं प्लेटलेट्स

डेंगू के इलाज के दौरान एस्प्रीन, ब्रूफीन और नॉनस्टीराइड, एंटीइंफ्लामेटरी ड्रग्स अवॉइड करें।

प्लेटलेट्स कब चढाएं :
सामान्य व्यक्ति में दो से चार लाख प्लेटलेट्स होती है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, दस हजार से कम प्लेटलेट्स होने पर हर पेशेंट में प्लेटलेट्स चढाना जरुरी है। जब प्लेटलेट्स तीस हजार से कम हों और पेशेंट में ब्लीडिंग हों तो प्लेटलेट्स चढाई जानी चाहिए।
बचाव:
पेशेंट को लिक्विड जैसे सूप, दूध, ज्यूस ज्यादा से ज्यादा दें। कैलोरी बिल्डअप करें। ताकि कॉम्पिलेकेशन डवलप नहीं हो पाएं। अभी डेंगू वैक्सीन का ट्रायल तीसरे फेज में चल रहा है। मच्छरों को कंट्रोल किया जाए।

डेंगू में आयुर्वेद इलाज में पेशेंट को संजीवनी, गोदन्ती भस्म, अकीक पिष्टी, कहरवा पिष्टी, शुभरा भस्म जैसी आयुर्वेदिक दवा दिन में तीन बार पिलानी चाहिए।
पपीते के पत्तों का रस पेशेंट को पिलाएं। अगर पत्ते ना मिलें तो कच्चे पपीता का रस दे सकते हैं।
हरी घास का रस पिलाने से भी ब्लड प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ती हैं।
पेशेंट की इम्युनिटी पॉवर को बढ़ाने के लिए २० से २५ मुनक्का, २ से ४ अंजीर भिगो कर दें।
१ गिलास पानी में आधा चम्मच हल्दी, तुलसी के पत्ते और अदरक का रस उबाल कर देने से भी काफी फायदा होता है।
१ लीटर पानी में १५ से २० लौंग को उबाल लें इस पानी को दिन भर में थोड़ा-थोड़ा पेशेंट को पिलाएं।

गिलोय : गिलोय को २ गिलास पानी में उबालें, जब पानी आधा रह जाए तो इस पानी को ठंडा करके रोगी को पिलाएं। करीब १ घंटे में ही इससे रोगी की प्लेटलेट्स तेजी से वापस बढ़ने लगती हैं। गिलोय के अलावा आंवला भी बहुत उपयोगी है। इसमें विटामिन सी अैर आयरन उच्च मात्रा में मिलता है।
धनिया पत्ती : डेंगू बुखार से राहत के लिए धनिया पत्ती के जूस को टॉनिक के रूप में पिया जा सकता है। यह बुखार को कम करता है।
तुलसी के पत्ते : तुलसी के ८ से १० पत्तों को २ गिलास पानी में उबालकर छान लें। दिन में दो से तीन बार पिलाएं।
काढ़ा: एक नींबू के आठ टुकड़े छिलके समेत, पन्द्रह नीम के पत्ते, १० काली मिर्च का पाउडर, १५ तुलसी के पत्ते, ५ ग्राम गिलोय, ५ ग्राम चिरायता, ५ ग्राम कुटकी, ५ ग्राम अदरक, १ लीटर पानी (स्टील या मिट्टी के बर्तन) में उबालें। आधा बच जाने पर उतार लें। तीन घंटे के अंतराल पर आधा कप बुखार उतरने तक पिलाते रहें।

डेंगू में पेशेंट की इम्युनिटी पावर को बढ़ाने के लिए मुनक्का और अंजीर भिगो कर दें। गिलोय, तुलसी और लौंग का पानी बुखार कम करने और

प्लेटलेट्स बढ़ाने में होगा मददगार

आंवला, हरा धनिया घटाएगा फीवर
लिक्विड डाइट और कैलोरी इन टेक बढ़ाएं
हल्दी, तुलसी अौर अदरक का रस है टॉनिक

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