चेतन भगत – जिंदगी के अनछुए पहलू

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    – बॉलीवुड में आकर आप में क्या बदला?
    आज भी वैसा हूं। कुछ समय पहले मेरी किताब वन इंडियन गर्ल आयी थी तब मेरा फोकस सिर्फ उस पर ही था। जब लिखता हूं तब दीन-दुनिया और बॉलीवुड से दूर हो जाता हूं। गोवा, दिल्ली, हांगकांग अपने दोस्तों के पास चला जाता हूं। मैं खुद को बार बार याद दिलाता हूं कि मेरा वजूद सिर्फ फिल्मों के कारण नहीं है। मुझे एक बार एआर रहमान ने कहा था “ये इंडस्ट्री मगरमच्छ का तालाब है। आप एक तरफ खड़े होकर नहा लो लेकिन गहरे पानी में मत उतरो। जिस दिन आप उतर गए तो मगरमच्छ आपको खा जायेगा।’
    -आपकी पत्नी कितना सहज हैं?
    हम नार्मल परिवार की तरह रहते हैं। मेरी वाइफ मुझे कॉलेज के ज़माने से जानती हैं। वे भी आईआईएम से हैं काफी समझदार हैं। किताबों में से गलतिया निकालती है।
    -आईआईएम एक ऐसा क्या फैक्टर देता है जो वहां के स्टूडेंट्स रिस्क लेने में पीछे नहीं?
    आईआईएम के स्टूडेंट का पैशन और फंडामेंटल अलग होता है। स्टूडेंट वहां के लिए इतनी मुश्किल एग्जाम पास करता है। उसको भरोसा होता है कि डिग्री आपको बड़ा जॉब दिला देगी। इसलिए कुछ रिस्क ले लेते हैं। मैंने पहली किताब यह सोच कर नहीं लिखी थी की जॉब छोड़ दूंगा। तीन किताबे पसंद की सबने तब लगा मैं इसी दिशा में कर सकता हूं।
    आपका घर कमाल की लोकेशन पर है?
    मैं सात साल पहले यहां शिफ्ट हुआ। बॉलीवुड का हार्टलैंड है पाली हिल। यहां वहीदा रहमान जी का बंगला होता था पहले, इसलिए इस बिल्डिंग का नाम “वहीदा’ है और ये “नरगिस दत्त रोड’ है। किस्मत की बात है कि नासिर हुसैन साहब का आइकोनिक बंगला मेरे पड़ोस में है। मेरी मां जब मुझे इस एड्रेस पर लेटर लिखती तो उन्हें बहुत अच्छा लगता। सब उनके पसंदीदा सितारे हैं।
    -बैंकर, राइटर और अब सह निर्माता की यात्रा पर क्या कहेंगे?
    मैं दिल से आज भी मिडिल क्लास परिवार का ही हूं। मेरा लक्ष्य देश के हर हिंदी भाषी रीडर तक पहुंचना है। मैं देश के चुनिंदा लेखकों में से हूं जो हिंदी और इंग्लिश दोनों में लिखता हूं। स्क्रिप्ट भी मैं हिंदी में लिखता हूं। किसी भी इंग्लिश अख़बार से पहले मैंने भास्कर के लिए लिखना शुरू किया। मेरी हर फिल्म में एक मैसेज होता है जिसे मैं अब ग्लैमर से भरी कहानी के रूप में दर्शकों तक ला रहा हूं। जो मैनेजमेंट मैंने बैंक में अप्लाई नहीं किया लेकिन फिल्म मेकिंग में कर लिया। इंडस्ट्री में राइटर को ज्यादा भाव नहीं मिलता लेकिन आज मेरे नाम से फिल्म बिक रही है क्यूंकि मेरी किताब पर बन रही है।
    -अन्य लेखकों की तुलना में आप लाइम लाइट में ज्यादा रहते हैं?
    मेरी पहचान बॉलीवुड के बाहर भी है और मैं कई मुद्दों पर अपनी राय रखता हूं। ज्यादातर सेलिब्रिटी और राइटर मुद्दों के बारे में अपनी राय नहीं देते लेकिन मैं हर विषय पर अपनी बात रखता हूं।
    -सह निर्माता के तौर पर एक खास काम जो आपने किया?
    मैंने फिल्म “हाफ गर्लफ्रेंड’ की कॉस्ट कम रखी। फिल्म का स्केल बड़ा है लेकिन बजट लिमिटेड। मोहित सूरी की यूएसपी कम बजट में काम करना है।

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