आर्किटेक्चर में करियर : सैलरी, कहाँ से करें, संभावनाएं, पूरी जानकारी|

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किसी भी इमारत की उपयोगिता,उसके सुंदरता व मजबूती आदि को सटीक ढंग से आकलन कर डिजाइन करने का काम करते हैं-आर्किटैक्ट्स। चाहे घर हो,ऑफिस हो या कोई अन्य इमारत,उसके क्षेत्रफल के अनुसार उसकी उपयोगिता बढ़ाने का जिम्मा होता है आर्किटैक्ट्स का साथ ही उस इमारत का डिजाइन उम्दा हो यह तय करना भी। आज के इस प्रगतिशील दौर में,गगनचुम्बी इमारतों का डिजाइन करने के शौक को एक करियर के रूप में अपनाया जा सकता है- आर्किटैक्ट के रूप में।

वांछित योग्यता
साइंस साइड का स्टूडेंट होना-बारहवीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी ग्रेजुएशन लेवल पर आर्किटेक्चर कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं।
बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर के कोर्स में आर्किटेक्चरल डिजाइन, प्लानिंग, आर्ट एप्रिसिएशन, बिल्डिंग मैनेजमेंट, नेचर एंड एन्वायरन्मेंट, मेथड ऑफ कंस्ट्रक्शन और हिस्ट्री ऑफ आर्किटेक्चर जैसे उपविषयों वाला पांच साल का बी.आर्क का कोर्स पूरा क रना होगा।
बी.आर्क. कोर्स में प्रवेश हेतु काउंसिल ऑफ
प्राइवेट और गवर्नमेंट कॉलेजेस में प्रवेश के लिए ऑल इंडिया लेवल का एप्टीट्यूड टेस्ट ।
इंजीनियरिंग कॉलेजेस में इंजीनियरिंग कोर्सेज व आर्किटेक्चर कोर्स मेंं दाखिले के लिए कॉमन यानी एक ही परीक्षा का आयोजन।
बी.आर्क डिग्री के बाद पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स (18 महीने से 2 साल अवधि का) भी कर सकते हैं।

स्पेशलाइजेशन एरिया-
इस क्षेत्र में दो तरीके से स्पेशलाइजेशन किया जा सकता है-विभिन्न प्रकार की बिल्डिंग्स को बनाने के क्षेत्र या कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट और फर्म मैनेजमेंट ।

आगे कैसे बढ़ें
आर्किटेक्चर के कोर्स के फाइनल ईयर में आपको अप्रेंटिसशिप करनी पड़ती है। विभिन्न प्रेक्टिकल समस्याओं से रूबरू होने के बाद आप इस फील्ड में स्वयं को छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स हैंडल कर सकेंगे। इस क्षेत्र में निरंतर काम करने के बाद आप एक विशेषज्ञ बन जाते हैं। इतने वर्ष इस विधा मे काम करने के बाद आप विभिन्न टेक्निकल मुद्दों, कॉस्टिंग या कानूनी पहलुओं पर सलाह देने की स्थिति में होंगे व ऐसे मुकाम पर पहुंच जाएंगे जहां आपको एक विशेषज्ञ आर्किटैक्ट के रूप में जाना जाने लगेगा।

कार्य प्रणाली —
आर्किटेक्ट के काम में अनेक स्किल्स शामिल हैं जैसे-डिजाइनिंग, इंजीनियरिंग, मैनैजीरियल और सुपरवाइजरी। एक आर्किटेक्ट डिजाइन वर्क को अपना मुख्य करियर बना सकता है। बिल्डिंग्स की डिजाइन में आर्ट व साइंस दोनों शामिल हैं यानि व्यावहारिकता व विज्ञान का मेल इस पेशे में देखने में आता है,अर्थात् किसी भी इमारत को बेहतरीन बनाने के लिए उसमें स्पेस मैनेजमेंट व उपयोगिता के साथ साथ उसकी सुंदरता का भी ख्याल रखना जरूरी है। इस प्रोफेशन में क्लाएंट आर्किटेक्ट को बजट और बनाई जाने वाली बिल्डिंग के बारे में बताता है।

आर्किटेक्ट अपने अनुभव व कौशल को इस्तेमाल कर स्केच और मॉडल बनाकर डिजाइन पेश करता है। क्लाएंट की आवश्यकता के अनुसार इस डिजाइन में सुधार किए जाते हैं। पहले से बनी बिल्डिंग को रिडिजाइन करना या बिल्डिंग को अंदर से डिजाइन करना भी आर्कि टेक्ट की जॉब का एक महत्वपूर्ण पहलू है। बिल्डिंग निर्माण से संबंधित सरकारी अनुमति प्राप्त क रना, इंजीनियर्स और सर्वेयर्स के साथ हुए समझौतों क ी रूपरेखा बनाना, ड्राइंग बनाना, समय समय पर साइट पर जाकर निर्माण क ार्य की जांच करते रहना, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को सुनिश् िचत करना आदि काम भी इस पेशे में करने होते हैं।

सरकारी संस्थानों में भी काम-
आर्किटेक्ट में डिग्री मिलने के बाद आपके लिए काम की संभावनाएं गवर्नमेंट और प्राइवेट, दोनोंं ही सेक्टर में खुल जाएंगी। सरकारी फर्म में बतौर आर्किटेक्ट नियुक्त होकर अर्बन प्लानिंग टीम का हिस्सा बन सकते हैं। द टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ऑर्गेनाइजेशन, मिनिस्ट्री ऑफ अर्बन डेवलपमेेंट, नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड, सेंट्रल पब्लिक वक्र्स डिपार्टमेंट (सीपीडब्लूडी), नेशनल बिल्डिंग ऑर्गेनाइजेशन, हडको, जैसी सरकारी इकाइयों में भी बी.आर्क डिग्री प्राप्त लोगों के लिए काफी अवसर हैं।

आमदनी
कोर्स के बाद आपको काम ट्रेनी के तौर पर ही शुरू करना होगा। इस समय मिलने वाली आय फर्म और उसकी पॉलिसी पर निर्भर क रती है। एक ट्रेनी को शुरूआत में छह से आठ हजार के बीच मिल सकता है। इसके बाद प्रतिमाह 20,000 तक की आय प्राप्त की जा सकती हैं। अगर स्वयं का ही काम करना शुरू कर दिया, तो फिर इसके माध्यम से होने वाली आय का हिसाब रखना मुश्किल है।

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