अदनान सामी : जीने का अलग अंदाज़

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    जीने का सबका अलग-अलग अंदाज होता है। मेरा भी एक अलग अंदाज है। मैं विपरीत पस्थितियों में भी कभी निराश नहीं होता, हमेशा खुश रहता हूं, छोटी-छोटी बातों का भी भरपूर मजा लेता हूं, यही मेरे जीने की कला है। मेरी सेहत का राज देशी घी में बना खाना और हमेशा खुश रहना है। यही वजह है कि मैं इतना मोटा हूं। हंसते हुए अदान मजाक में कहते हैं मेरा वजन दो टन है फिर भी मुझे अपने मोटापे से कोई शिकायत नहीं है। गाना गाने के लिए मुझे खूब सारी ताकत लगानी पड़ती है, लेकिन मेरे मोटापे ने मुझे कभी ताकत की कमी महसूस नहीं होने दी। वैसे भी लोगों के लिए मेरी शक्ल-सूरत नहीं मेरी आवाज ज्यादा मायने रखती है। मैं मानता हूं कि जिस तरह प्रार्थना से ईश्वर के दिल में जगह मिलती है, ठीक वैसे ही संगीत से लोगों के दिलों में जगह मिलती है। मेरे संगीत और ईश्वर ने मुझे इस काबिल बनाया कि लोग मुझे जानें, मुझे चाहें। जब लोग कहते हैं आपका गीत मैंने जब अपनी रूठी हुई प्रेमिका को सुनाया तो वह झट मान गई मेरे लिए सबसे प्यारे उपहार होते हैं, जो मेरी प्रसिद्ध ने मुझे दिए हैं। मेरे प्रशंसक मुझे जितना प्यार देते हैं, मेरा मन उनके लिए आदर से और भर जाता है।
    मैं नास्तिक नहीं हूं। मैं ईश्वर/अल्ला दोनों में विश्वास रखता हूं। मेरी सफलता का श्रेय ईश्वर/अल्ला को भी जाता है। मैं मानता हूं कि मुझे अल्लाह ने मेरी काबिलियत से कहीं ज्यादा मुझे दिया। जीवन के हर के चीज के लिए मैं उसे धन्यवाद देता हूं। दिन की शुरुआत बहुत महत्वपूर्ण होती है, इसलिए मैं हर सुबह को नए अंदाज में देखता हूं। मैंने कभी रूटीन प्लानिंग से काम नहीं किया। ये बात मेरी आदत में शामिल नहीं रही है। बस जो जरूरी होता है उसे पहले करता हूं। आप मुझे थोड़ा मनमौजी भी कह सकते हैं। काम का डर या परिश्रम मुझे कभी परेशान नहीं करते हैं। जो काम ठान लेता हूं, उसे पूरा करके ही दम लेता हंू। किसी काम को करने के लिए सबसे अच्छा समय मुझे उस काम के लिए मिली पे्ररणा है जो बाथरूम में नहाते वक्त मुझे नल से गिर रहे पानी के आवाज से भी मिल जाती है। किसी गाने को बनाते वक्त मेरे अनुभव काम आते है- हर व्यक्ति के जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, मगर मैं उन तर्जुबों क ा जाया नहीं होने देता। जो दर्द मुझे जीवन में मिलते हैं, उन्हें बस महसूस करता हूं और अपने नग्मों के जरिए उस दर्द को पेश कर देता हूं।
    संगीत के लिए ललक शुरू से ही मुझमें थी। संगीत मुझे जोश से भर देता है। बहुत कम लोगों को पता है कि मैं गाना गाने के साथ प्यानों भी बहुत अच्छा बजा लेता हूं। बचपन से ही मेरे खिलौने रिकार्ड प्लेयर और स्पीकर रहे हैं। पांच साल की उम्र से मैंने गाना गाना शुरू किया और नौ साल की उम्र में म्यूजिक कंपोजिंग सीखी। मेरे गुरू पं. शिवकुमार शर्मा है, उनकी ही कृपा है, जो आज मैं इस मुकाम पर हूं। हालांकि मेरा जन्म इंगलैण्ड में हुआ है, लेकिन भारत के संगीत की सुरीली अवाज मुझे यहां तक खींच लाई है। जब भी मैं भारत आता पं. शिवकुमार शर्मा से संगीत की धुनों के बारे में जानता। वे मुझे बड़े प्यार से सीखाते, तभी से मैं संगीत का आदी हो गया। उनकी ही लगन और मेहनत से मैं इस मंजिल तक पहुंचा हूं।
    मेरे पिता पाकिस्तानी पठान और मां हिन्दु है, मगर मेरा दिल हिन्दुस्तानी है। हिन्दुस्तान मुझे बहुत अच्छा लगता है। मुझे यहां का संगीत, खाना और लोग बहुत पसंद है। लता मंगेशकर और रफी के गाने मैं बचपन से सुनते-सुनते बड़ा हुआ हूं। संगीत के अलावा फिल्म देखने और नेट सर्फिंग करना का भी मेरा शौक है। बेहद रोमांटिक हूं मैं, मुझे प्रेम शब्ïद भी रोमांचित कर देता है। मैं गायक हूं, इसका मतलब यह नहीं कि आम लोगों की तरह मुझमें कमियां नहीं हैं। मुझे गुस्सा भी आता है, लेकिन किस बात पर यह निश्चित नहीं मैं लोगों को उनकी गलतियों के लिए माफ कर देता हूं, मगर उन गलतियों को भूलता नहीं हूं। और गलतफमियां मेरे दुख का कारण बनती हैं। । जो लोग मुझे चाहते हैं तो मैं भी उन्हें बेहद चाहता हूं। इतनी-सी उम्र में हालांकि मुझे बहुत कुछ मिला है, लेकिन यह मेरी मंजिल नहीं है। ये मेरा विश्वास है कि ईश्वर के आर्शीवाद से मैं और भी आगे जाऊंगा।

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