प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती- यह लोकोक्ति परम् पूज्य गुरूदेव सुरेश श्रीमाली जी पर चरितार्थ होती है। श्रीमाली जी ने अत्यन्त अल्पायु में ही लाखों साधकों को कठिन व असाध्य दु:खों से छुटकारा दिलाकर इस उक्ति को चरितार्थ किया।
बचपन से ही ज्योतिष और आध्यात्मिक संस्कारों से संस्कारित श्रीमाली जी ने अपने पिता द्वारा विरासत में मिले ज्योतिष और आध्यात्म को आत्मसात कर अपने पिता की कीर्ति को नए आयाम दिए और कीर्ति पताकाओं को भारत की सीमाओं के बाहर अनेकानेक देशों तक फहराया। कीर्ति का यह लहराता परचम ही इस बात का साक्षी है कि श्रीमाली जी ने विरासत को न केवल सहेजा और संवारा बल्कि सर्व दिशाओं में पहँुचाया। अल्पायु में ही उनकी भविष्यवाणियां सटीक और सत्य होने लगी फिर वे भारत भ्रमण पर निकल पड़े और देश के सभी प्रमुख शहरों में ज्योतिष व समस्या-समाधान शिविरों तथा ज्योतिष सम्मेलनों का सिलसिला प्रारम्भ किया जिसमें साधक अपने कष्टों, परेशानियों और संकटों को लेकर आते और गुरूदेव साधकों को असाध्य दु:खों से छुटकारा दिलाते। धीरे-धीरे साधकों के दिलों में इन युवा और तेजस्वी ज्योतिषी ने आदरणीय स्नेह स्थान बना लिया। गुरूदेव ने भारत के प्राय: सभी प्रमुख शहरों में अपने शिविरों के निरन्तर सफल संचालन के पश्चात् 2002 से देश के बाहर इस ज्ञान गंगा को बहाने का निश्चय किया। 2002 में वे पहली बार एशियाई देशों की यात्रा पर निकले और आज वे 48 से अधिक देशों में ज्योतिष शिविरों का आयोजन कर चुके है। गुरूदेव श्री सुरेश श्रीमाली जी ने जिस देश की धरती पर कदम रखा वहाँ के साधकों ने उन्हें पलक-पांवड़े बिछाकर उनका मान-सम्मान किया। अब विदेशी नागरिकों की रूचि गुरूदेव के शिविरों के प्रति इतनी बढ़ गई है कि वे ज्योतिष के माध्यम से सांसारिक समस्याओं के निराकरण के साथ-साथ गुरूदेव द्वारा ”आध्यात्मÓÓ से संबंधित ज्ञान प्रवाह सुनने को उत्सुक रहते है।
अन्तरराष्ट्रीय ख्यातिनाम, यशस्वी, ज्योतिष शास्त्र मर्मज्ञ, साधना सम्पन्न, यंत्र-मंत्र-तंत्र की विलक्षण चमत्कारिक शक्ति के धनी आराध्य गुरूदेव सुरेश श्रीमाली जी की विदेश यात्राओं में लंदन स्थित नेहरू केन्द्र में भारतीय विदेश सेवा की वरिष्ठ महिला अधिकारी मोनिका मेहता ने परम् पूज्य गुरूदेव का सम्मान व स्वागत किया।
परम पूज्य गुरूदेव श्री सुरेश श्रीमाली जी निरन्तर और नियमित शिविर करते हुए भी कहीं न कहीं इस बात से चिंतित रहते थे कि वे और अधिक साधकों को समय नहीं दे पाते हैं। देश और विदेश में साधक उनसे मिलने को समय मांगते हैं और उनकी अत्यधिक व्यस्त दिनचर्या के चलते यह संभव नहीं हो पा रहा था। शिविरों में समय सीमा रहती है और उनके साधक शिविर में आकर भी मिल नहीं पाते हंै। तब गुरूदेव ने 2001 में टी.वी. पर अपने कार्यक्रम देने प्रारम्भ किए। आज अनेक चैनल्स पर परम् पूज्य गुरूदेव श्री सुरेश श्रीमाली जी के कार्यक्रमों को देख-सुनकर लाखों लोग रोजाना लाभान्वित हो रहे हैं।
इतनी व्यस्तताओं के साथ ज्योतिष के क्षेत्र में शोध और अनुसंधान का कार्य भी गुरूदेव श्री सुरेश श्रीमाली जी नियमित कर रहे हैं। गुरूदेव द्वारा संचालित आध्यात्मिक साधना सिद्धि केन्द्र में रात-दिन चलने वाले शोध व अनुसंधान कार्यों की देख-रेख श्रीमाली स्वयं करते हैं। साथ ही अपने ज्ञान का खजाना साधकों तक पहुंचाने के लिए 11 जनवरी 2009 को उन्होंने पाक्षिक पत्रिका ग्रहों का खेल आरम्भ की।
जिसका विमोचन मशहूर क्रिकेटर गौतम गंभीर द्वारा किया गया था परन्तु साधकों के ज्ञान की प्यास अतृप्त होती देख गुरूदेव ने आठ पृष्ठ की पाक्षिक पत्रिका को 24 अक्टूबर 2010 को मासिक पत्रिका का रूप दिया तथा इस शुभ कार्य का लोकार्पण विख्यात उद्योगपति एवं राजनेत्री श्रीमती सावित्री जिन्दल ने किया। हाल ही में भारतीय राजनीति में अपना विशेष स्थान रखने वाले श्री सुशील कुमार शिंदे ने भी गुरूदेव से भेंट करके अपने उज्जवल भविष्य हेतु उनका आशीर्वाद लिया तथा मुलाकात के बाद श्रीमाली जी ने यह बताया कि आने वाले समय में शिंदे भारतीय राजनीति के शिखर पर नजर आयेंगे। साथ ही श्रीमाली जी ने आशीर्वाद स्वरूप उन्हें कुछ विशेष आध्यात्मिक सामग्रियां उनके उज्जवल भविष्य हेतु भेंट की।
देश के प्रखर भविष्यवक्ता, आध्यात्म व ज्योतिष शास्त्र के ज्ञाता तथा देश-विदेश के असंख्य साधकों व भक्तों की भाव पूर्ण दृष्टि में गुरूदेव स्वरूप माने जा रहे श्रीसुरेश श्रीमालीजी द्वारा की जा रही भविष्यवाणियां पौराणिक काल की आकाशवाणी की तरह सत्य साबित होती जा रही हैं- उन्होंने अपनी पत्रिका ग्रहों का खेल के माध्यम से बताया कि –
क्रिकेटर गौतम गंभीर भारतीय क्रिकेट टीम में उच्च स्तर पर पहुंचेंगे व यश, मान-सम्मान को प्राप्त करेंगे।
भारतीय क्रिकेट टीम द्वारा विश्व कप जीतने की प्रबल संभावनाएं और यह विश्व कप भारत का ही होगा।
जापान पर प्राकृतिक आपदा के संकेत, भारी क्षति होने की संभावना।
केन्द्रीय सत्ता से जुड़े कुछ मंत्रियों की विदाई, भ्रष्टाचार के विरूद्ध सरकार द्वारा कड़ी कार्यवाही, कुछ बड़े नेता गिरफ्तार भी होंगे तथा कुछ बड़े घोटालों की जाँच प्रारम्भ होगी।
ब्रिटिश अभिनेत्री एलिजाबेथ हर्ले तथा भारतीय टेक्सटाइल मुगल अरूण नायर का विवाह ढाई-तीन वर्षों में ही टूट जायेगा।
राहुल गांधी को सुरक्षा के घेरे में रहना चाहिए, उन्हें शारीरिक चोट लगना संभव।
वसुंधरा राजस्थान की राजनीति में पुन: सक्रिय होंगी तथा हताश पार्टी नए सिरे से स्थापित करने के प्रयास में जुटेंगी।
दिल्ली सहित भारत के कुछ राज्यों में भूकम्प के झटके आना संभव।
तिब्बतियों के धर्मगुरू कर्मापा उग्येन त्रिनले संकट में पड़ सकते हैं।
इन सारी भविष्यवाणियों के सहित कई ऐसी भविष्यवाणियां हैं, जो गुरूदेव ने समय-समय पर की और वे अक्षरश: सत्य साबित हुईं।
श्रीमाली जी ने देश-विदेश के साथ-साथ सम्पूर्ण श्रीमाली समाज में सबसे अधिक लोकप्रिय युवा एवं श्रीमाली समाज में भी विशिष्ट स्थान स्थापित किया है तथा समय-समय पर वह अपने समाज के कल्याण हेतु कई तरह के योगदान देते रहे है। हाल ही में मुम्बई में श्रीमाली समाज द्वारा गुरूदेव का भव्य स्वागत व सम्मान हुआ। गुरूदेव को कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि बनाकर उनका सत्कार करके उन्हें शॉल ओढ़ा व श्रीफल भेंट करके सम्मानित किया गया।
यही नहीं, परम् पूज्य गुरूदेव ने लाखों साधकों की नि:स्वार्थ सेवा हेतु आध्यात्मिक साधना सिद्धि ट्रस्ट का भी निर्माण किया है जिसमें उनका मूल उदेश्य है कि सभी को सुख, चैन और वैभव के साथ जीवन जीने का सुअवसर प्रदान होना चाहिए इसके लिए ट्रस्ट समय-समय पर सम्मेलन, सेमीनार एवं गोष्ठियों का आयोजन कर समाज सेवा का कार्य सम्पन्न कर रहे है। अत: ट्रस्ट द्वारा समय-समय पर विशेष अवसरों व त्यौहारो पर नेत्रहीन, अपंग, कुष्ठ रोगी तथा जरूरतमंद लोगों को दान स्वरूप आवश्यक सामग्री प्रदान की जाती है।
परम् पूज्य गुरूदेव श्री सुरेश श्रीमाली जी ने कर्म को ही पूजा माना है। उनका अपने साधकों को संदेश भी यही है कि सभी के प्रति सद्भावना रखो। यदि हमारे मन में सद्भावना नहीं है, तो हमारी पूजा-अर्चना, भक्ति और ज्ञान सब व्यर्थ और निरर्थक है। परमात्मा सदैव उन्हीं से प्रसन्न रहते हैं जो दूसरों को प्रसन्न करते हंै। गुरूदेव का कहना है कि प्राणी मात्र से प्रेम ही ईश्वर की सच्ची पूजा है।

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