विटामिन्स की कमी – 10 टिप्स

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vitamin capsules

ज्यादातर लोग अपनी मर्जी से विटामिन्स खा रहे हैं। उन्हें मालूम नहीं है, बॉडी में किस विटामिन की कमी है। पैरों में जलन, सुन्न होना, झनझनाहट होना, कमजोरी आना विटामिन बी1, बी+, विटामिन 12 की कमी का सिमटम है।
डायबिटिज में डी निभाता है अहम रोल—-
हड्डियों में दर्द होना विटामिन डी की कमी, विटामिन की कमी से स्किन का ड्राई होना। मुंह में छाले और होंठ कटने पर बी कॉम्पलेक्स दिया जाता है। क्रैम्प आना और ब्रेस्ट में दर्द होने पर विटामिन और विटामिन के लेना चाहिए। विटामिन सी की कमी पर मसूड़ों से खून आता है। नई स्टडीज के मुताबिक, विटामिन डी का डायबिटीज और हार्ट डिजीज में रोल होता है। इनकी कमी से ये दोनों बीमारियां होने की संभावना होती है।

विटामिन कॉकटेल्स : हर व्यक्ति को थकान, डिप्रेशन से नहीं देती राहत

मायर्स कॉकटेल यानी-
सेलिब्रिटीज के बीच फेमस हो रहे विटामिन्स और मिनरल्स के सॉल्यूशन को मायर्स कॉकटेल के नाम से जाना जाता है, जो लगभग 30 साल पहले बाल्टीमोर के फिजिशियन जॉन मेयर्स ने इनवेंट किया। इसमें मेग्नीशियम, कैल्शियम और विटामिन बी१, बी२, बी३, बी५, बी६, बी९ और बी१२ विटामिन सी होता है। इनमें विटामिन्स की डोज टेबलेट की तुलना में ज्यादा होती है। मिसाल के तौर पर विटामिन सी की मात्रा सामान्य डोज यानी 90 मिलीग्राम से लगभग 300 गुना ज्यादा होती है।

हैल्दी और फिट रहने के लिए हर व्यक्ति विटामिन्स ले रहा है। विटामिन्स की कमी जितनी नुकसानदायक है उतनी ही हानिकारक है विटामिन्स को ज्यादा मात्रा में लेना। फिट रहने के लिए विटामिन कॉकटेल यानी इंट्रावीनस विटामिन थैरेपी -विटामिन ड्रिप ट्रीटमेंट का ट्रेंड उभरकर सामने रहा है। रिसर्च के मुताबिक, चार से छह सप्ताह के सेशन में आईवीटी दी जा रही है। इस थैरेपी में विटामिन और मिनरल्स का कॉकटेल ड्रिप के जरिए सीधा ब्लड स्ट्रीम में पहुंचाया जाता है। यह दावा किया जाता है कि थकान, डिप्रेशन से राहत देकर मेटाबोलिज्म और इम्युन सिस्टम को मजबूत बनाती है। वास्तविकता में हर व्यक्ति को यह थैरेपी देने का कोई फायदा नहीं है।

जरूरत से ज्यादा विटामिन डी नुकसान पहुंचाते हैं, ये दोनों फैट सॉल्यूबल विटामिन हैं, इन्हें लेने से लीवर में सूजन आने की संभावना रहती है

बी की कमी से नर्व सिस्टम कमजोर
हमारी डाइट में पर्याप्त विटामिन्स पाए जाते हैं। विटामिन्स की कमी विशेष रूप से उन लोगों में देखने को मिलती है जो दूध, दूध से बने प्रोडक्ट्स और नॉन-वेजिटेरियन डाइट लेते हैं। इनमें अधिकाशंतः विटामिन बी 12 की कमी हो जाती है। लंबे समय तक यह कमी रहने पर नर्व सिस्टम का कमजोर होना, पांवों में झनझनाहट और एनिमिया हो जाता है। विटामिन डी और कैल्शियम की कमी होने पर सप्लीमेंट लेना चाहिए। कमी नहीं होने और ज्यादा मात्रा में लेने पर विटामिन डी नुकसान पहुंचाते हैं। ये दोनों फैट सॉल्यूबल विटामिन हैं। इन्हें लेने से लीवर में सूजन आने की संभावना रहती है। यह दोनों पानी में घुलने वाले विटामिन्स नहीं होने से बॉडी में स्टोर होकर नुकसान पहुंचाते हैं।

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