ल्यूकोडर्मा का इलाज: 10 सरल टिप्स

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आयुर्वेद : बकरी का दूध फायदेमंद

एलोपैथी : विटामिन सी अवॉइड करें

नेचुरोपैथी : हरी सब्जियां ज्यादा खाएं

बेमेल भोजन, फास्ट फूड, खासकर चाइनीज सॉस आदि से यह समस्या हो सकती है।
उपचार: बकुची,भ्रंगराज, खदीर, क्वात, पटोल मूलाधी, काको उधमबरादी, लोथ्रासाउ, मधुकासउ, कनकबिंदू, अस्टि, पंचनिदांमी चूरण, शशि लेखावटी, श्वेत कुष्ठारी रस, चित्रकारी रस से सफेद दाग ठीक किए जा सकते हैं।
लेप-मन शिलाभी लेप, अवल गुजादी, कोकोउदबरादी लेप, तिलवकादी लेप के नियमित इस्तेमाल से भी इसमें लाभ मिल सकता है।
-रोगी को बकरी का दूध पिलाना भी लाभदायक रहता है।
-गिलोए, मंजीठ और नीम के रस भी लाभ देते हैं।
-फास्ट फूड और मांसाहारी भोजन सफेद दाग के दौरान वर्जित है।

कारण : जेनेटिकया मिस मैच कॉम्बिनेशन का खाना खाने पर भी हो सकता है।
सफेद दाग होने पर सुबह शाम १ घंटे तक धूप जरूर लें। काले चने का पानी, हरी सब्जियों में पालक, बथुआ, मेथी का सेवन करें। छोटा टुकड़ा अदरक और १ चम्मच बावसी का चूर्ण मिलाकर उबाल कर पिएं। यह लीवर से संबंधित बीमारी होती है इसलिए लीवर पर ठंडा गर्म सेक करें और सफेद पदार्थों का सेवन कम करें। बेमेल खाने जैसे दूध के साथ नमक, हरी पत्तेदार सब्जियों या तिल से बनी चीजों के साथ दूध-दही से बने पदार्थों का सेवन, मूली के साथ गुड़, नॉनवेज भोजन के बाद दूध-दही से बने पदार्थों का सेवन, नमक के साथ शहद, करेले के साथ दही का प्रयोग, खट्टे फलों के साथ दूध, दूध या दही आदि के गलत कॉम्बिनेशन से यह बीमारी हो सकती है।

ल्यूकोडर्मा यानी स्किन पर सफेद रंग के लहसुन जैसे दाग बन जाना। फंगल इंफेक्शन के कारण कई बार पूरा शरीर सफेद हो जाता है। बीस से पचास साल की उम्र में अक्सर यह बीमारी देखने को मिल जाती है। स्किन में पाए जाने वाला पिगमेंट मिलानिन कम होने पर सफेद दाग या लहसुन बनते हैं।

पंच ग्राफ्टिंग से किया जा सकता है ल्यूकोडर्मा का इलाज

कारण: पॉल्यूशन और कैमिकल से प्रतिरोधक क्षमता बदल रही है। इससे स्किन को कलर देने वाली सैल मरने लगती है और स्किन का रंग बदलना शुरू हो जाता है। कुछ लोगों में ब्रेन से सप्लाई होने वाली नर्व डिफेक्टिव हो जाती है। फुटवियर्स के कैमिकल और रबड़ की चप्पल से यह होता है।
मेक्सामीटर इंस्ट्रूमेंट से नापते हैं कलर: इंस्ट्रूमेंटसे मैलानिन को नापते हैं। मैलानिन कम होता है, उनमें पिगमेंटशन भी कम होता है। अर्ली स्टेज पर डायग्नोस कर लंबे ट्रीटमेंट से बचाया जा सकता है।
ट्रीटमेंट: सर्जरी से पंच ग्राफ्टिंग होती है। इसमें दो एमएम, तीन एमएम के पंच बनाकर स्किन ग्राफ्ट करते हैं। कमर और जांघ से स्किन लेकर ग्राफ्ट की जाती है।
खाने में विटामिन सी बंद: खाने में विटामिन सी बंद कर दिया जाता है।

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