माइग्रेन दर्द कैसे भगाये-Symptoms, Causes & Treatment in Hindi- How To Cure Migraine Pain

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माइग्रेन हो तो…

हालांकि लाइफस्टाइल और जेनेटिक कारण माइग्रेन की मुख्य वजह है, लेकिन कई बार बिहेवयरल और इमोशनल स्ट्रेस के कारण भी माइग्रेन हो जाता है। बचाव सबसे अच्छा उपाय है इलाज के लिए ये दवाएं डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही लें। खुद इलाज करने से और बिना जांच कराए पेन किलर्स लेने से माइग्रेन में और जटिलताएं जाती हैं।

माइग्रेन ट्रीटमेंट
इंटरनेशनल हैडेक जेनेटिक्स कंसोरटियम के साइंटिस्ट के अनुसार माइग्रेन का प्रमुख कारण ब्लड फ्लो से जुड़ा हुआ है। जब ब्रेन की ब्लड वैसल्स में किसी तरह की रुकावट आती है तो माइग्रेन होता है। माइग्रेन के लिए प्रिवेंटिव मेडिसिन में ज्यादातर बीटा ब्लॉकर्स और कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स दिए जाते हैं। एक्यूट माइग्रेन अटैक होने पर पेन किलर, ट्रिप्टेन और अरगोटेमिन प्रिस्क्राइब की जाती है। फिलहाल ऑप्टोजेनेटिक्स के मेनिपुलेशन से माइग्रेन के ट्रीटमेंट पर रिसर्च हो रही है।

खान-पान से ही इलाज
आयुर्वेद में बताया जाता है कि शिरोधरा और कुछ विशेष औषधियों लेप से माइग्रेन में फायदा पहुंचता है। माइग्रेन होने पर सबसे पहले भोजन कम कर देना चाहिए। तनाव मुक्त रहें। योग, प्राणायाम और डाइटिंग से माइग्रेन कंट्रोल किया जा सकता है। ये उपचार अपनाएं-
-आगरा का पेठा दूध के साथ लेना चाहिए। भ्रामरी प्राणायाम भी लाभदायक होता है।
-नारियल कद्दूकस कर २०० ग्राम बूरा, १० ग्राम शिरेसुलादिवज्र रस मिलाकर लड्डू बनाएं। सुबह-शाम खाली पेट खाएं। देशी घी की जलेबी सूर्योदय से पहले खाएं।

-सिर पर चंदन, मुलेठी या दालचीनी के लेप सेे भी आराम पाया जा सकता है।
-पंचकर्म में शिरोधरा करवाएं इससे भी माइग्रेन में आराम मिलता है।
-हर्बल दवाओं में शंखपुष्पी और जटामासी का सेवन भी कर सकते हैं। माइग्रेन से बचने के लिए खट्टी और तली चीजें नहीं खाएं

सिर के आधे हिस्से में लंबे समय तक दर्द बने रहना माइग्रेन कहलाता है। देश में हर उम्र के एक करोड़ लोग माइग्रेन से ग्रसित हैं। रिसर्च बताती है कि जिन महिलाओं में माइग्रेन की समस्या होती है उन्हें स्ट्रोक और दिल की बीमारियां होने का खतरा ज्यादा रहता है। वहीं बच्चों में इमोशनल एब्यूज भी इस बीमारी की प्रमुख वजह है। १८ साल से ज्यादा की उम्र में लड़कियों के बजाय लड़कों में माइग्रेन ज्यादा होता है। इस उम्र में हार्मोनल बदलाव से माइग्रेन हो सकता है।
लक्षण: चिड़चिड़ापन,तनाव, अवसाद, उल्टी, जी मिचलाना, लंबे समय तक सिर में दर्द माइग्रेन के लक्षण हैं। इसका दर्द अमूमन एक से ७२ घंटे तक रहता है।
प्रकार: माइनर,क्लासिकल, ट्राइजेमिनल, और न्यूरोलार्जिक। दर्द के 24 घंटे पहले ही लक्षण दिखने लगते हैं। कई बार पेशेंट में विजुअल माइग्रेन भी होता है जिसमें पेशेंट को टेढ़ी-मेढ़ी लाइनें और गोले दिखाई देते हैं। 50 परसेंट पेशेंट में जेनेटिक माइग्रेन होता है जो पेरेंट्स से बच्चों में ट्रांसफर होता है।
खान-पानसे भी हो सकता है माइग्रेन: कुछलाइफस्टाइल और फूड हैबिट्स से माइग्रेन होता है। जैसे चाय, कॉफी, आइसक्रीम, चीज, आिद से माइग्रेन हो सकता है। कुछ लोगों में खुशबू, तेज रोशनी तो कुछ में पेट दर्द से माइग्रेन शुरू होता है और सिर तक पहुंचता है।

माइग्रेन मैनेजमेंट: इंजेक्टेबल बीटा ब्लॉकर, कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स, एंटी स्ट्रेस, डिप्रेशन, एंग्जाइटी मेडिसीन से माइग्रेन मैनेज किया जाता है।
देश में १० मिलियन लोग माइग्रेन की बीमारी से ग्रसित हैं। यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है। बच्चों में चार से पांच साल की उम्र और एडल्ट्स में २०-३० साल की उम्र में माइग्रेन शुरू होता है।
दूध नहीं ताजी सब्जियों का जूस लें
सबसे ज्यादा कारगर है कुंजल प्रक्रिया, मिट्टी पट्टी और गर्म ठंडा सेक।
कुंजल क्रिया- शरीरमें कई बार एसिड सीक्रेशन होते हैं। सुबह-सुबह 4 से 5 गिलास पानी पीकर उल्टी करें। उससे एसिड सीक्रेशन कम होगा और टॉक्सिन निकलेंगे।
गर्म-ठंडा सेक-3 मिनट तक ठंडा और दो मिनट का गर्म सेक, 15 मिनट तक करें।
मिटी-पट्टी-20 मिनट की मिट्टी पट्टी लेप करें ये सिर को ठंडक पहुंचाएगा। हर रोज शीतली प्राणायाम, शीतकारी प्रणायाम करें।
आहार-खट्टी चीजें जैसे टमाटर, अमचूर, संतरा आदि खाएं। खजूर, सेब, दूध से बने आहार, चॉकलेट, जंक फूड, तली-भुनी चीजें खाने से बचें। दूध से बने पदार्थों में टायरोसिन नामक एंजाइम होते हैं जो एलर्जी कर सकता है। डाइट में अंकुरित आहार, मिक्स वेजिटेबल जूस शामिल करें। जिसमें लौकी, चुकंदर, पालक और गाजर हों। शाम के वक्त दही या छाछ के सेवन से बचें।

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