बेरियाट्रिक सर्जरी- ये जानना है जरूरी…

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बेरियाट्रिक सर्जरी के बाद – पेशेंट्स को नहीं चाहिए इंसुलिन

दुनिया भर में अोबेसिटी को लेकर इंडिया तीसरे नंबर पर है। ओबेसिटी घटाने और डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए बेरियाट्रिक सर्जरी विकल्प बन चुकी है।

-१८ से ६५ साल तक होती है सर्जरी
-डायबिटिक पेशेंट्स की बीएमआई ३२.५ से ज्यादा, सामान्य ओबीज का बीएमआई 40 से ज्यादा होना जरूरी
-सर्जरी के बाद ३० से ३३ परसेंट डाइट लेकर भर सकते हैं पेट
-सप्ताह में चार दिन पंद्रह से बीस मिनट तक करें वॉक या एक्सरसाइज

सर्जरी से पांच साल पुरानी डायबिटीज ही ठीक हो पाती है। ओबीज के साथ-साथ डायबिटीज उन लोगों में ठीक हो पाती है, जिनकी पेनक्रियाज में बीटा सैल रिजर्व और इंसुलिन की मात्रा पर्याप्त है। पैंतीस डायबिटिक पेशेंट्स पर हुई एक स्टडी में पाया कि सर्जरी के बाद ३८ परसेंट पेशेंट्स ठीक हो पाएं। ६२ परसेंट लोगों में यह ठीक नहीं हो पाई। इन पेशेंट्स का सिर्फ वजन कम हुआ। वे इंसुलिन और दवाइयां लेते रहे। इंसुलिन की मात्रा कम होने पर सर्जरी का फायदा नहीं है। बीटा सैल खत्म होने पर सर्जरी के बाद पेनक्रियाज रिजनरेट नहीं हो पाती है। पेनक्रियाज ठीक होने पर ही डायबिटीज कंट्रोल रहती है।

बेरियाट्रिक सर्जरी वजन ही नहीं डायबिटीज में बनने वाले इंसुलिन को कंट्रोल करने में मददगार है। टाइप टू डायबिटिक पेशेंट्स में इंसुलिन की मात्रा को कंट्रोल कर सकते हैं, लेकिन पूरी तरह से इंसुलिन को बनने से रोकना बंद नहीं क्वकर सकते हैं। पेशेंट्स उम्र भर इंसुलिन लेते हुए परेशान हो जाता है। बेरियाट्रिक सर्जरी से टाइप टू डायबिटीज में ८५ परसेंट तक इंसुलिन को बंद कर दिया जाता है। इंसुलिन की मात्रा नहीं बढ़े, इसके लिए पेशेंट्स के लिए सीमित मात्रा में खाना जरूरी है। अब यह कॉस्मेटिक नहीं इलेक्टिव सर्जरी बन चुकी है। यह लाइफ सेविंग सर्जरी है। पेशेंट की क्वालिटी ऑफ लाइफ बढ़ जाती है। पेट को काटकर एक स्मॉल पाउच बनाया जाता है। इस पाउच के चारों तरफ एक विशेष बैंड लगाया जाता है। इससे शुगर और फैट एब्जॉर्ब नहीं हो पाए। ओवर इटिंग करने और पाउच का साइज बढ़ने पर दुबारा वजन बढ़ता है।

बेरियाट्रिक सर्जरी से मोटापा घटा कर डायबिटीज को कंट्रोल किया जा रहा है। ओबेसिटी और डायबिटीज दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यदि वजन को घटा दिया जाए तो डायबिटीज कंट्रोल हो जाती है। डायबिटीज और अोबेसिटी से होने वाली बीमारियों की रिस्क कम हो जाती है। देश के नामी-गिरामी बेरियाट्रिक सर्जंस का दावा है कि यह सर्जरी पचास से सत्तर किलोग्राम वजन घटाने के साथ-साथ अस्सी से सौ फीसदी तक डायबिटीज भी कंट्रोल कर देती है।

८ किलो तक घटता है वजन

डायबिसिटी-यानीडायबिटीज और ओबेसिटी का कॉम्बिनेशन। ओबीज पेशेंट्स में ६० परसेंट लोग डायबिटिक हैं। ६० परसेंट डायबिटिक ओबीज हैं। ओबेसिटी खत्म नहीं होने पर डायबिटीज को कंट्रोल नहीं कर सकते हैं। ओबेसिटी खत्म होते ही सौ परसेंट तक डायबिटीज ठीक हो जाती है। लोगों को मेडिसिन लेने की जरूरत नहीं है, जबकि लंबे समय की डायबिटीज होने पर दवाइयां कम हो जाती हैं। सर्जरी के बाद हर महीने छह से आठ किलोग्राम वजन कम होता है। वहीं, ओबेसिटी की वजह से ब्लड प्रेशर, फ्रेक्चर, ज्वाइंट्स पेन और हर्निया आदि खत्म हो जाते हैं। वहीं, लड़कियों में मोटापे और हार्मोनल बदलाव से होने वाली पीसीओडी, इनफर्टिलिटी प्रॉब्लम ठीक होती हैं। इस सर्जरी का गोल्ड स्टैंडर्ड गेस्ट्रो बाईपास है।

इंसुलिन की जरूरत नहीं
इंडिया में एडोलसेंट ओबेसिटी बढ़ रही है। डायबिटिक में बीएमआई ३५ और सामान्य ओबीज में ४० से ज्यादा होने पर सर्जरी होती है। गेस्ट्रिक बाईपास और स्लिव गेस्ट्रोक्टॉमी से वजन कम किया जाता है। जैसे १०० किलोग्राम वजन होने पर सर्जरी के बाद ५० से ६० किलोग्राम तक वजन घट जाता है। लाइफस्टाइल मेंटेन करके ८० से ९० परसेंट तक वजन कम किया जा सकता है। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन और इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के मुताबिक, वजन ज्यादा और डायबिटीज कंट्रोल नहीं होने पर सर्जरी से कंट्रोल कर सकते हैं। सर्जरी के बाद ८० परसेंट इंसुलिन नहीं दवाइयां लेते हैं। सौ फीसदी लोगों में दवाइयां कम हो जाती हैं। ६० परसेंट लोगों में दवाइयां और इंसुलिन दोनों बंद हो जाते हैं।

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