बांझपन- लक्षण-कारण-आयुर्वेदिक उपचार Infertility Treatment

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infertility cure tips
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कभी-कभी बांझपन का कारण गर्भाशय की जन्मजात विकृति हो सकती है। गर्भाशय की विकृति के कारण बार-बार गर्भपात हो जाता है और गर्भावस्था का समयकाल पूरा करने में समस्याएं आती हैं। असामान्य गर्भाशय किसी महिला के गर्भवती होने के अवसरों को प्रभावित कर सकता है। महिलाओं में बांझपन के 10 प्रतिशत मामलों का कारण असामान्य गर्भाशय होता है। कभी-कभी गर्भाशय में खराबी, इसमें गर्भ के विकास के दौरान जाती है। दूसरे अंगों के समान ही किसी भी महिला के प्रजनन अंग तभी विकसित होते हैं जब वह अपनी मां के गर्भाशय में एक गर्भ के रूप में होती है। गर्भाशय या फैलोपियन ट्यूब के विकास में किसी भी तरह की विकृति को मुलेरियन एनोमलीस कहते हैं। मुलेरियन एनोमलीस कई प्रकार की होती हैं, जैसे गर्भाशय की अनुपस्थिति से लेकर एक के बजाय दो गर्भाशय, सर्विक्स और योनि आदि का होना, जिसे डिडेलफिस कहते हैं।
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क्या है असामान्य गर्भाशय
बहुत कम ही महिलाओं में देखा जाता है कि गर्भाशय की स्थिति के बजाय उसकी सरंचना और रूपरेखा सामान्य से अलग होती है। इसे गर्भाशय की असामान्यता या यूटेराइन एनॉमली कहते हैं। एक अनुमान के अनुसार बांझपन का उपचार कराने आने वाली महिलाओं में २० में से एक महिला गर्भाशय की असामान्यता से पीड़ित होती है। सामान्यत: गर्भाशय से संबंधित गड़बड़ियां किसी महिला को गर्भवती होने से नहीं रोकती हैं। बल्कि कई बार तो महिलाएं यह भी नहीं समझ पातीं कि उनके गर्भाशय में किसी प्रकार की आसामान्यता है जब तक कि उन्हें बार-बार गर्भपात नहीं होता या समयपूर्व प्रसव नहीं हो जाता।
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सामान्य लक्षण
कई महिलाओं को असामान्य गर्भाशय से कोई समस्या नहीं होती है, बल्कि इसके बारे में तब तक पता नहीं चलता जब तक कि मासिक चक्र प्रारंभ हो या गर्भधारण करने का प्रयास किया जाए। अगर असामान्य गर्भाशय जैसे कि गर्भाशय का आधा होना गर्भाशय के अवशिष्ट हार्न से संबंधित है, तो मासिक चक्र के प्रवाह में अवरोध आएगा। इसके परिणाम स्वरूप दर्द होगा जो मासिक चक्र के दौरान गंभीर हो जाएगा। अगर इसका उपचार कराया जाए तो गर्भाशय में रक्त एकत्र हो जाएगा और इसमें संक्रमण भी फैल सकता है।
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उपचार के कई विकल्प
गर्भाशय में असामान्यता के इलाज के लिए जो प्रक्रिया इस्तेमाल की जाती है उसमें सम्मिलित है पेल्विक परीक्षण, हिस्टेरोसैल्पिंगोग्राम, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई लैप्रोस्कोपी हिस्टेरोस्कोपी। कई गड़बड़ियों को सर्जरी के द्वारा ठीक किया जा सकता है। अगर योनि नहीं है तो नई योनि बनाई जा सकती है। गर्भाशय के आकार को ठीक करने के लिए अक्सर मेट्रोप्लास्टी का इस्तेमाल किया जाता है। जो गर्भाश्य सेप्टम के द्वारा दो भागों में विभाजित है उसे हिस्टेरोस्कोपिक के द्वारा ठीक किया जा सकता है। कुछ मामलों में सर्विक्स को समय से पहले फैलने से रोकने और गर्भ के जीवित रहने की दर को बढ़ाने के लिए सर्विकल सर्कलेज किया जाता है।
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कभी-कभी बांझपन का कारण गर्भाशय की जन्मजात विकृति हो सकती है। गर्भाशय की विकृति के कारण बार-बार गर्भपात हो जाता है और गर्भावस्था का समयकाल पूरा करने में समस्याएं आती हैं। असामान्य गर्भाशय किसी महिला के गर्भवती होने के अवसरों को प्रभावित कर सकता है। महिलाओं में बांझपन के १० प्रतिशत मामलों का कारण असामान्य गर्भाशय होता है। कभी-कभी गर्भाशय में खराबी, इसमें गर्भ के विकास के दौरान जाती है। दूसरे अंगों के समान ही किसी भी महिला के प्रजनन अंग तभी विकसित होते हैं जब वह अपनी मां के गर्भाशय में एक गर्भ के रूप में होती है। गर्भाशय या फैलोपियन ट्यूब के विकास में किसी भी तरह की विकृति को मुलेरियन एनोमलीस कहते हैं। मुलेरियन एनोमलीस कई प्रकार की होती हैं, जैसे गर्भाशय की अनुपस्थिति से लेकर एक के बजाय दो गर्भाशय, सर्विक्स और योनि आदि का होना, जिसे डिडेलफिस कहते हैं।
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क्या है असामान्य गर्भाशय
बहुत कम ही महिलाओं में देखा जाता है कि गर्भाशय की स्थिति के बजाय उसकी सरंचना और रूपरेखा सामान्य से अलग होती है। इसे गर्भाशय की असामान्यता या यूटेराइन एनॉमली कहते हैं। एक अनुमान के अनुसार बांझपन का उपचार कराने आने वाली महिलाओं में २० में से एक महिला गर्भाशय की असामान्यता से पीड़ित होती है। सामान्यत: गर्भाशय से संबंधित गड़बड़ियां किसी महिला को गर्भवती होने से नहीं रोकती हैं। बल्कि कई बार तो महिलाएं यह भी नहीं समझ पातीं कि उनके गर्भाशय में किसी प्रकार की आसामान्यता है जब तक कि उन्हें बार-बार गर्भपात नहीं होता या समयपूर्व प्रसव नहीं हो जाता।
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सामान्य लक्षण
कईमहिलाओं को असामान्य गर्भाशय से कोई समस्या नहीं होती है, बल्कि इसके बारे में तब तक पता नहीं चलता जब तक कि मासिक चक्र प्रारंभ हो या गर्भधारण करने का प्रयास किया जाए। अगर असामान्य गर्भाशय जैसे कि गर्भाशय का आधा होना गर्भाशय के अवशिष्ट हार्न से संबंधित है, तो मासिक चक्र के प्रवाह में अवरोध आएगा। इसके परिणाम स्वरूप दर्द होगा जो मासिक चक्र के दौरान गंभीर हो जाएगा। अगर इसका उपचार कराया जाए तो गर्भाशय में रक्त एकत्र हो जाएगा और इसमें संक्रमण भी फैल सकता है।
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उपचार के कई विकल्प
गर्भाशय में असामान्यता के इलाज के लिए जो प्रक्रिया इस्तेमाल की जाती है उसमें सम्मिलित है पेल्विक परीक्षण, हिस्टेरोसैल्पिंगोग्राम, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई लैप्रोस्कोपी हिस्टेरोस्कोपी। कई गड़बड़ियों को सर्जरी के द्वारा ठीक किया जा सकता है। अगर योनि नहीं है तो नई योनि बनाई जा सकती है। गर्भाशय के आकार को ठीक करने के लिए अक्सर मेट्रोप्लास्टी का इस्तेमाल किया जाता है। जो गर्भाश्य सेप्टम के द्वारा दो भागों में विभाजित है उसे हिस्टेरोस्कोपिक के द्वारा ठीक किया जा सकता है। कुछ मामलों में सर्विक्स को समय से पहले फैलने से रोकने और गर्भ के जीवित रहने की दर को बढ़ाने के लिए सर्विकल सर्कलेज किया जाता है।