फिजियोथैरेपी -कोर्स- अवधि, प्रक्रिया, सैलरी, अवसर, कहां से करें -पूरी जानकारी Career in Physiotherapy

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देश व दुनिया में आज हेल्थ सेक्टर का जितना विस्तार हो रहा है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि आगे चलकर काबिल फिजियोथैरेपिस्ट की मांग और बढ़ेगी।

फिजियोथैरेपी विज्ञान की ऐसी विधा है जिसके अंतर्गत शारीरिक व्यायाम के जरिए व्यक्ति के रोगों व व्याधियों का उपचार किया जाता है। फिजियोथैरेपिस्ट का काम रोगियों में किसी बीमारी, चोट, अक्षमता या बढ़ती उम्र की वजह से उपजी शारीरिक व्याधियों का उपचार करना है। आज लोग बीमारी के उपचार के लिए समग्र नजरिया अपनाने लगे हैं। इसकी वजह से दुनिया भर में फिजियोथैरेपिस्ट्स की मांग में तेजी से इजाफा हुआ है।

काम का दायरा

फिजियोथैरेपिस्ट्स अस्पतालों, विकलांगों के लिए बने पुनर्वास केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों, शारीरिक व मानसिक रूप से अक्षम व्यक्तियों के लिए बने स्कूलों, स्वास्थ्य संस्थानों के अलावा डिफेंस मेडिकल प्रतिष्ठानों और स्पोट्र्स क्लबों में भी अपनी सेवाएं देते हैं। इंजुरी व फ्रैक्चर्स, जोड़ों के दर्द, खिंचाव, मोच, स्ट्रोक्स के उपचार में काबिल फिजियोथैरेपिस्ट की सेवाएं कारगर साबित होती हैं।

बढ़ती मांग

आज जिस तरह के अत्याधुनिक अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र व क्लीनिक्स खुल रहे हैं और हेल्थ सेक्टर का विस्तार हो रहा है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि फिजियोथैरेपिस्ट की मांग आगे चलकर और बढ़ेगी। कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी खुद को फिट रखने व फिटनेस संबंधी सुझाव लेने के लिए फुलटाइम पर्सनल फिजियोथैरेपिस्ट्स की सेवाएं लेते हैं। विदेशों में और खासकर अमेरिका, कनाडा व ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पर्सनल फिजियोथैरेपिस्ट्स की जबरदस्त मांग है।

योग्यता

फिजियोथैरेपी में कोई डिग्री अथवा डिप्लोमा/सर्टिफिकेट कोर्स करने के लिए अभ्यर्थी को फिजिक्स, केमिस्ट्री या बायोलॉजी के साथ 12वीं या इसके समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए। अस्पताल व क्लीनिक्स अमूमन ऐसे लोगों को रोजगार देते हैं, जिनके पास फिजियोथैरेपी में बैचलर डिग्री (बीपीटी) हो। बीपीटी करने के बाद छात्र यदि चाहें तो अपनी विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन भी कर सकते हैं। फिजियोथैरेपी में डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स की अवधि छह महीने से लेकर दो साल तक हो सकती है। डिग्री स्तर के कोर्स की अवधि तीन से चार साल तक होती है। प्रतिष्ठित संस्थान कॉमन एंट्रेस टेस्ट (सीईटी) के जरिए बीपीटी कोर्स में छात्रों को दाखिला देते हैं।

व्यक्तिगत योग्यता

फिजियोथैरेपिस्ट्स बनने की चाह रखने वाले अभ्यर्थियों में लंबे समय तक खड़े रहकर काम करने की क्षमता होनी चाहिए। काबिल फिजियोथैरेपिस्ट वही है जो मरीज की जरूरत को अच्छी तरह समझ सके, उसके प्रति संवेदनशील रवैया अपनाए। सफल फिजियोथैरेपिस्ट बनने के लिए व्यक्ति में इन खूबियों के अलावा मानवीय संरचना का संपूर्ण ज्ञान होना भी अति-आवश्यक है।

पारिश्रमिक

इस क्षेत्र से जुड़ा कोई फ्रेश ग्रेजुएट किसी हॉस्पिटल या क्लीनिक में ट्रेनी फिजियोथैरेपिस्ट के तौर पर 8,000-12,000 रुपए वेतन पाने की उम्मीद कर सकता है। हालांकि प्रतिष्ठित अस्पतालों में आपको और भी अच्छा वेतन मिल सकता है। अनुभव हासिल करने के बाद आपके वेतन में खासा इजाफा हो सकता है। अनुभवी फिजियोथैरेपिस्ट चाहें तो निजी क्लीनिक खोल कमाई कर सकते हैं।

कोर्स करवाने वाले संस्थान

स्कूल ऑफ फिजियो एंड ऑक्युपेशनल थैरेपी, जयपुर
इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड हाइजीन, नई दिल्ली।
मदर टेरेसा इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज, पुडुचेरी।
आदिपराशक्ति कॉलेज ऑफ फिजियोथैरेपी एंड पैरा. सा., तमिलनाडु।
अमर ज्योति इंस्टीट्यूट ऑफ फिजियोथैरेपी, दिल्ली।
चेन्नई मेडिकल कॉलेज, तमिलनाडु।

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