प्रेग्नेंसी -इन गलतियों के कारण बच्चे को पहुंचता है नुकसान

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प्रेग्नेंसी के दौरान ३४० कैलोरी और ३०० मिली पानी लें एक्सट्रा

प्रेग्नेंसी में इन गलतियों के कारण बच्चे को पहुंचता है नुकसान

हैल्थ

प्रेग्नेंसी में रखें इन बातों का खास ख्याल
फ्लूवैक्सीन : फ्लूवैक्सीन के लिए महिलाओं में अवेयरनेस की कमी है। सिर्फ १० प्रतिशत महिलाएं ही फ्लू वैक्सीन लगवाती हैं, जबकि प्रेग्नेंसी में यह हर महिला को लगवाना ही चाहिए। इस वेक्सीनेशन से करीब ७० प्रतिशत तक फ्लू से सुरक्षित रखा जा सकता है। करीब ६ महीने तक मदर और बेबी का स्वाइन फ्लू या अन्य फ्लू के खतरे से बचाव रहता है। अक्सर महिलाएं इस टीके को लगवाने से बचती हैं। इसके अलावा प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले रूबेला वेक्सीनेशन भी लगवाना चाहिए। डब्लूएचओ ने इस वेक्सीनेशन को रूटीन वेक्सीनेशन में शामिल किया है। यह कई तरह के वायरस से बचाव करता है।

प्रेग्नेंसी में महिलाएं कई ऐसी गलतियां करती है जिससे नॉर्मल डिलीवरी के चांस कम हो जाते है। महिलाओं को क्या खाना चाहिए, किस तरह एक्सरसाइज करनी चाहिए। महिलाओं को जानकारी सही होनी चाहिए। प्रसव पूर्व देखभाल महिलाओं और शिशु दोनों के लिए बहुत जरूरी है। प्रेग्नेंट महिलाओं को नियमित मेडिकल जांच करानी चाहिए। उन्हें इस बात की भी जानकारी होनी चाहिए कि प्रेग्नेंसी में कैसे रहना है, क्या खाना है, क्या करना है और क्या नहीं।
प्रेग्नेंसी में की जाने वाली पांच गलितयों के बारे में
सप्लीमेंट खाने से बचती हैं महिलाएं
कमर का दर्द कैल्शियम की कमी से भी होता है। इसलिए सप्लीमेंट जरूर लें। महिलाएं सप्लीमेंट खाने से बचती हैं, सप्लीमेंट की कमी से डाउन सिंड्रोम और न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट हो सकते हैं। फॉलिक एसिड, आयरन और कैल्शियम लेना ही चाहिए। कमर दर्द, थकान जैसी तकलीफों से बचने के लिए महिलाओं को नियमित ४० मिनट वॉक, योगा, प्राणायाम, हल्की एक्सरसाइज करनी चाहिए। सोनोग्राफी करने से महिलाएं मना कर देती हैं। रेडिएशन से बच्चे की हैल्थ पर असर पड़ सकता है। जबकि बच्चे की ग्रोथ और हैल्थ का सही पता सोनोग्राफी से ही लग पाता है।

डबल डाइट लेना
प्रेग्नेंसी में जरूरत से ज्यादा खाएं। अक्सर प्रेग्नेंट महिलाओं को यह गलतफहमी रहती है जबकि उनका आहार संतुलित होना चाहिए जिसमें सभी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिल सकें। अमेरिकन अकेडमी ऑफ न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स के अनुसार नॉर्मल बीएमआई वाली महिलाओं को दूसरे ट्रायमेंस्टर में ३४० कैलरी और तीसरे में ४५० कैलरी एक्सट्रा लेनी चाहिए।ओवर ईटिंग या बिना मन के खाने से तेजी से वजन बढ़ेगा। साथ ही ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हार्मोनल डिस्बैलेंस जैसी बीमारियां घेर लेंगी। इसलिए मल्टी डाइट के साथ ३ से ४ लीटर लिक्विड डाइट जरूर लें। सुबह की शुरुआत शुगर फ्री दो बिस्किट से करें, उसके बाद जैसे मन करे वैसा फूड खाएं। डॉक्टर से डाइट चार्ट जरूर लें।

सेल्फ मेडिकेशन

इस पीरियड में महिलाएं बिना सोचे समझे सेल्फ मेडिकेशन की गलती करती हैं जबकि इस दौरान पैरासिटामोल,एंटेसिड या फिर एक्ने की क्रीम का इस्तेमाल बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है।ओवर काउंटर ड्रग्ज का इस्तेमाल या सख्त ब्यूटी ट्रीटमेंट की वजह से बच्चे में कोन्जेनाइटल डिजीज या एबनॉर्मेलिटी भी हो सकती हैं।

हायड्रेशनकी कमी
प्रेग्नेंसीके दौरान पानी की कमी या कमजोर हायड्रेशन की वजह से कॉमप्लीकेशन बढ़ सकते हैं।न्यूट्रिशन इन चाइल्ड बियरिंग ईयर्स की लेखिका एमा डर्बीशायर के अनुसार इस दौरान पानी का इनटेक ३०० मिली. बढ़ाना चाहिए।डिलीवरी के बाद लगभग 700 मिली पानी का इनटेक बढ़ाया जाना चाहिए।
आराम ज्यादा, एक्सरसाइज कम
प्रेग्नेंसीमें अक्सर महिलाएं रूटीन वर्क को कम करते हुए जरूरत से ज्यादा आराम के मोड पर जाती हैं। इससे सिजेरियन डिलीवरी होने का रिस्क बढ़ जाता है। प्रेग्नेंसी का मतलब यह नहीं कि आप एक्टिव नहीं रह सकतीं। कुछ वर्कआउट कर पाएं, पर एक्टिव रहने के लिए थोड़ा-थोड़ा वर्कआउट जरूर करें। फिर चाहे वो घर का काम हो या पार्क में टहलना। आखिर के कुछ हफ्तों में सिर्फ टहलना भी आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।हालांकि नींद की कमी भी होनी चाहिए।

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