परफेक्ट सन केयर के तरीके- सनस्क्रीन के फायदे नुक्सान जो आप नहीं जानते- सनस्क्रीनपर लिखे कॉमन लेबल और उनका अर्थ

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– अगर आपकी त्वचा संवेदनशील है तो जिंक ऑक्साइड, टाइटैनियम ऑक्साइड सनस्क्रीन इस्तेमाल करें। ये एलर्जिक रिएक्शन होने से रोकेगा।
प्रोडक्ट पर फाइन प्रिंट्स- सनस्क्रीनको अलग उसके इंग्रीडियंट्स बनाते हैं। कई ब्रैंड्स में इनऑर्गेनकि इंग्रीडियंट्स जैसे जिंक ऑक्साइड, टाइटैनियम ऑक्साइड होते हैं, जो सूर्य की किरणों को परावर्तित कर देते हैं। इन्हें पहचानने के लिए आखिरी अक्षरों को देखें ये ईएनई, ओएनई या एटीई पर खत्म होंगे। उदाहरण के लिए ऑक्सीबेनजोन। जो यूवी किरणों को अवशोषित कर लेता है। ऑक्सीबेंजोफीन जैसे तत्वों को कैंसर जैसी बीमारियों से जोड़ा गया है।
एसपीएफ-
डॉक्टरोंके मुताबिक 30  से 50  एसपीएफ का इस्तेमाल सही है। एसपीएफ 90 पढ़ते ही उस ट्यूब पर आकर्षित हों। 90 का मतलब यह नहीं कि वो त्वचा को 30  की तुलना में तीन गुना ज्यादा प्रोटेक्शन दे देगा। एसपीएफ30  अगर97  फीसदी किरणें फिल्टर करता है तो एसपीएफ 50 का सनस्क्रीन 98  फीसदी किरणें फिल्टर करेगा।
सनस्क्रीन ब्रैंड्स हमेशा बड़े-बड़े दावे करते हैं। पर हर प्रोडक्ट उन्हें पूरा नहीं कर पाता है।
सनस्क्रीनपर लिखे गए कुछ कॉमन लेबल और असल में उनका अर्थ क्या होता है-

अपने सनस्क्रीन को ऐसे जानें
  वॉटर रेजीस्टेंट :
यूएसफूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक सनस्क्रीन वॉटर रेजीस्टेंट तभी है, अगर ४० मिनट तक पानी में रहने के बाद भी एसपीएफ एक्टिव रहे। हमारे देश में स्टेंडर्डाइजेशन और रेगुलेशन्स की कमी की वजह से यह पता लगाने का कोई तरीका नहीं है कि वॉटर प्रूफ होने का दावा करने वाला ब्रैंड असल में सही है।

स्वेट प्रूफ :
पसीना आने के ४० मिनट तक सनस्क्रीन बना रहता है यानी यह स्वेट प्रूफ है।

पीए+++:
पीएयानी अपके सनस्क्रीन ऑफर में प्रोटेक्शन का लेवल। ३ प्लस सबसे ज्यादा सुरक्षा देता है इससे कम के प्रोडक्ट को मत खरीदिए।
ब्रॉड स्पेक्ट्रम :

यानी सनस्क्रीन यूवीए (एजिंग की वजह) और यूवीबी (त्वचा जलाने वाली) किरणें दोनों से सुरक्षा देता है। अगर कोई ब्रैंड ब्रॉड स्पेक्ट्रम का दावा करता है तब भी ये देखना जरूरी है कि वो कम से कम एसपीएफ ३० और पीए +++ हो।

जिंक ऑक्साइड:
यहआपकी त्वचा तक सूर्य की किरणों को आने से रोकता है।
 टाइटैनियम डॉयोक्साइड :
जिंक ऑक्साइड की ही तरह यह यूवी किरणों को परावर्तित कर देता है।
 ऑक्सीबेनजॉन:
यह यूवी किरणों को अवशोषित कर लेता है। शोध में पाया गया कि त्वचा इसे अवशोषित कर लेती है, जिससे कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है।
 रेटिनाइल पल्मीमेट:
इसे कैंसर और एंडोमेट्रोसिस जैसी कई बीमारियों से जोड़कर देखा गया है।
 ऑक्टाइलमेथोक्सीनामेट:
 सनस्क्रीन में पाया जाने वाला यह तत्व एलर्जी की वजह बन सकता है।
 एक्स्पायरी डेट:
पिछले साल का बचा सनस्क्रीन इस्तेमाल कर रहे हैं और प्रोडक्ट के रंग या खुशबू में बदलाव हुआ है तो उसे फेंक दीजिए। प्रोडक्ट ज्यादा दिन इस्तेमाल करने के लिए उसे फ्रिज में रखें।

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