नकदी की किल्लत:: डिजिटल तरीकों से बिल चुकाएं

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कैशलेस इकॉनामी : डिजीटल इंडिया

अब कैश मार्केट में कम हो रहा है इसलिए लोग इसके  विकल्प ढूंढ रहे हैं। कोई भी व्यक्ति घर या कार्यालय या कहीं से भी से बैंक सुविधाओं का लाभ उठा सकता है।  मार्केट में कैश कम है,अब आपको कम से कम नकदी खर्च कर अपना काम चलाना होगा। लेकिन रोजमर्रा के खर्च तो टाले नहीं जा सकते। फि र नकदी कैसे बचाएं  इसका जवाब बेहद आसान है  डिजिटल भुगतान। जहां तक मुमकिन हो, दुकानों पर नकदी जेब से नहीं निकालें  उसके बजाय डिजिटल तरीकों से सामान की कीमत अदा करें या बिल चुकाएं।  जैसे, ऑनलाइन बैंकिंग इंटरनेट पर बैंकिंग संबंधी मिलनेवाली एक सुविधा है  जिसके माध्यम से कंप्यूटर का इस्तेमाल कर उपभोक्ता बैंकों के नेटवक्र्स और उसकी वेबसाइट पर अपनी पहुंच बना सकता है और घर बैठे ही खरीददारी, पैसे का स्थानांतरण के अलावा अन्य तमाम कार्यों और जानकारी के लिए बैंकों से मिलने वाली सुविधा का लाभ उठा सकता है। इतना ही नहीं  नकदी के मामले में कडक़ी के इस दौर में वित्तीय प्रौद्योगिकी से मिले दूसरे तरीके भी आपके काम आ सकते हैं।

1000 और 500 के नोट बंद करने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री ने  देश को भरोसा दिलाया कि ये फैसला अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि 1978 से आज के समय की तुलना नहीं की जा सकती उस वक्त बड़े नोट कम थे ब्लैक मनी भी कम था आज 86 प्रतिशत नोट 500 के हैं इसलिए उसका प्रभाव भी ज्यादा है। जहां तक गरीबों की बात है तो इस नियम से गरीब किसानों को कोई परेशानी नहीं होगी, किसान बैंक में पैसा रखेगा तो ज्यादा सुरक्षित रहेगा।  लेकिन चूंकि अब कैश मार्केट में कम हो रहा है इसलिए लोग इसके  विकल्प ढूंढ रहे हैं। आहए जानें क्या क्या किया जा सकता है कैशलेस होने के बाद-

नकदी की किल्लत तो आजमाएं नई जुगत:

विमुद्रीकरण की वजह से देश भर में नकदी की जो किल्लत हो रही है  उसकी वजह से शायद आपको भी बैंकों और एटीएम के सामने लंबी कतारों में लगना पड़ रहा होगा। अगर आप कतारों से निजात पाना चाहते हैं तो आपको कम से कम नकदी खर्च कर अपना काम चलाना होगा। लेकिन रोजमर्रा के खर्च तो टाले नहीं जा सकते। फि र नकदी कैसे बचाएं  इसका जवाब बेहद आसान है  डिजिटल भुगतान। जहां तक मुमकिन हो, दुकानों पर नकदी जेब से नहीं निकालें  उसके बजाय डिजिटल तरीकों से सामान की कीमत अदा करें या बिल चुकाएं। इतना ही नहीं  नकदी के मामले में कडक़ी के इस दौर में वित्तीय प्रौद्योगिकी से मिले दूसरे तरीके भी आपके काम आ सकते हैं।

मोबाइल वॉलेट
नकदी की किल्लत है और एटीएम से रकम निकलने की कोई गुंजाइश नजर नहीं आ रही है तो आप मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल कर सकते हैं। वॉलेट में किसी तरह का झंझट भी नहीं है और इसका तरीका एकदम सीधा है अपने फ ोन पर किसी भी मोबाइल वॉलेट का ऐप डाउनलोड करें। आपको गूगल प्लेस्टोर जैसी वेबसाइट पर ये आसानी से मिल जाएंगे। अपने बैंक खाते से रकम इस ऐप में डाल लें और इसका इस्तेमाल शुरू कर दें। जब भी आप किसी दुकान पर खरीदारी करने जाएंगे तो आपको क्यूआर कोड के पास अपना फ ोन लेकर जाना होगा, उसे स्कैन करना होगा, जो भी रकम अदा करनी है, उसे आपने अपने फ ोन में भरा और चुटकी बजाते ही वह रकम दुकानदार के पास पहुंच जाएगी।
हालांकि वॉलेट में आपको एक दिक्कत भी हो सकती है। दिक्कत यह है कि अलग.अलग दुकानदार भुगतान के लिए अलग.अलग वॉलेट का इस्तेमाल करते हैं। अब आप कितने वॉलेट डाउनलोड करेंगे,अगर यह समस्या है तो इसका इलाज भी मौजूद है और इलाज का नाम है वूहू । वूहू एक इंटीग्रेटर ऐप है  जिसे आप अपने फ ोन पर डाउनलोड कर सकते हैं। यह ऐप ऐसी किसी भी दुकान पर आपके काम आ सकती है  जहां ऑक्सीजन, सिट्रस कैश और पेयूमनी के जरिये रकम स्वीकार की जाती है। इसके अलावा उन दुकानों पर भी आपको आसानी होगी, जहां वूहू ने भुगतान के लिए साझेदारी की है।

मोबाइल वॉलेट से लें भुगतान-
मगर मामला तब जमेगा, जब कारोबारी के पास भी मोबाइल वॉलेट हो वरना आपके फ ोन की ऐप किसी काम नहीं आ पाएगी। अगर कारोबारी बड़ी मात्रा में रकम मंगाना चाहता है तो उसे अपने वॉलेट के लिए केवाईसी -अपने ग्राहक को जानें-आपैचारिकताएं पूरी करनी होंगी।  वॉलेट जब केवाईसी की औपचारिकताएं पूरी कर लेता है तो वह 1 लाख रुपये तक का भुगतान स्वीकार कर सकता है। अगर कोई कारोबारी अपने वॉलेट से रकम को बैंक खाते में भेजना चाहता है और उस पर किसी तरह की बंदिश नहीं चाहता है तो उसे एकीकृत भुगतान इंटरफेस यूपीआई  का इस्तेमाल करना चाहिए। वॉलेट प्रदाता फ ्रीचार्ज ने नए दुकानदारों के लिए कुछ वक्त तक सब कुछ मुफ्त कर रखा है। उन्हें फ्रीचार्ज से जुडऩे के लिए कोई भुगतान नहीं करना पड़ेगा और उसके जरिये भुगतान हासिल करने पर कोई कमीशन भी नहीं देना होगा,क्रेडिट कार्ड कंपनियां हरेक खरीदारी पर 2 से 4 फ ीसदी कमीशन काट लेती हैं।

माइक्रो एटीएम
अगर आपके पास 500 रुपये और 1,000 रुपये के पुराने नोट हैं और आप उन्हें जमा करना चाहते हैं, लेकिन लंबी कतारों में खड़े होने की आपकी बिल्कुल भी इच्छा नहीं है तो आप माइक्रो एटीएम की शरण में जा सकते हैं। आईडीएफ सी बैंक और ऑक्सीजन यह सुविधा मुहैया करा रहे हैं। हो सकता है कि आप किसी ऐसे शख्स को जानते हों  मसलन आपकी कामवाली, जो कुछ अरसा पहले ही शहर में आई हो और जिसका बैंक खाता उसके गांव वाली शाखा में हो। ऐसे लोग बेहिचक इन माइक्रो एटीएम का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इतना ही नहीं, माइक्रो एटीएम किसी भी बैंक या शाखा के ग्राहकों से पुराने नोट ले रहे हैं। यहां भी शर्त वही पुरानी है कि नोट देने आ रहे व्यक्ति के पास उसका आधार कार्ड जरूर होना चाहिए। माइक्रो एटीएम की उपयोगिता यहीं खत्म नहीं होती। किसी भी बैंक के ग्राहक माइक्रो एटीएम से रकम निकाल सकते हैं।
यहां नए खाते भी खोले जा सकते हैं। अगर आपके पास आधार कार्ड है तो आप चार मिनट के भीतर ही बैंक खाता खोल सकते हैं और आपको इसमें कोई भी कागजी कार्रवाई नहीं करनी पड़ेगी। खाता खोलने की यह सुविधा भी उन लोगों के काम की हो सकती है, जो हाल ही में गांव छोडक़र शहर आए हैं और जिनके पास आधार कार्ड तो है, लेकिन बैंक खाता नहीं है। लेकिन इसमें एक ही खामी है और बड़ी खामी है कि माइक्रो एटीएम की संख्या बहुत कम है।

तलाशिए करीबी एटीएम
नोटबंदी की वजह से शुरुआत में नकदी की जो किल्लत हुई, उसे देखकर घबराए हुए कई लोग अब आधी रात को घर से निकल रहे हैं और ऐसे एटीएम की तलाश कर रहे हैंए जहां नकदी तो है, लेकिन भीड़ नहीं है। ऐसी सूरत में पर्सनल फ ाइनैंस की एक ऐप वालनट आपके काम आ सकती है। वह आपको एटीएम के बारे में ही बताती है। अगर आपने वालनट ऐप डाउनलोड कर रखी है तो जैसे ही आप किसी एटीएम से रकम निकालेंगे, आपके पास बैंक से एसएमएस आएगा। इसी एसएमएस को आपके फ ोन में मौजूद वालनट ऐप पढ़ लेगी। उसके बाद ऐप ग्राहक से यानी आपसे पूछेगा कि आपने किस बैंक का इस्तेमाल किया है और एटीएम पर कतार लंबी थी या छोटी, आप इन सवालों का जवाब देंगे और वह जानकारी ऐप का इस्तेमाल करने वाले हरेक शख्स के पास पहुंच जाएगी। एटीएम की स्थिति यानी लोकेशन एक नक्शे पर दिखा दी जाएगी। अगर उसका रंग हरा होगा तो आप समझ जाएं कि उसे पिछले घंटे भर के भीतर इस्तेमाल किया गया है।

कैश ऑन डिलिवरी की जगह
ई.कॉमर्स कंपनियों पर खरीदारी तो जमकर होती है, लेकिन अभी तक उन पर 70 फ ीसदी भुगतान कैश ऑन डिलिवरी के रूप में होता था यानी सामान हाथ में आने के बाद ही ग्राहक नकदी पकड़ाता था। अब ग्राहकों के पास नकदी का टोटा हो गया है तो कैश ऑन डिलिवरी करीब.करीब बंद ही हो गई है। फ ्रीचार्ज और स्नैपडील अब वॉलेट ऑन डिलिवरी की जुगत लेकर आए हैं। अब आप स्नैपडील से सामान अपने घर पर आने के बाद फ ्रीचार्ज वॉलेट से भुगतान कर सकते हैं। इसी तरह ईबे ने ऑक्सीजन वॉलेट के साथ हाथ मिलाया है। ऐसे ग्राहक  जो न तो नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं और न ही जिनके पास डेबिट या क्रेडिट काडर्ड है  वे ऑक्सीजन से गठजोड़ वाले ऐसे रिटेल स्टोर में पहुंच सकते हैं  जहां माइक्रो एटीएम लगे हों। वह अपने पुराने नोट वहां जमा कर सकता है और रिटेलर की मदद से ईबे पर किसी भी उत्पाद को खरीदने के लिए ऑर्डर कर सकता है।

वर्चुअल व प्रीपेड कार्ड
आपके पास एक और विकल्प है और वह है वर्चुअल कार्ड। अब आप कहेंगे यह क्या होता है? यह दरअसल आभासी कार्ड होता है, जो आपके हाथ में कभी नहीं आएगा। मिसाल के तौर पर ऑक्सीजन वॉलेट अपने ग्राहकों को वीजा कार्ड बनाने का मौका देता है। आम तौर पर आपको वीजा कार्ड तभी मिल सकता है, जब आप किसी बैंक के ग्राहक हों। यहां आपको बैंक के चक्कर में नहीं पडऩा है और बैंक से दूर रहते हुए भी आप वीजा कार्ड हासिल कर सकते हैं। एक बार आपको यह कार्ड मिल गया तो जाहिर तौर पर आपके पास ऑनलाइन भुगतान के ज्यादा विकल्प आ जाएंगे।
नकदी की कमी होने की वजह से कई बार प्लास्टिक मनी की मदद से ही भुगतान करने पड़ते हैं। अगर सामान खरीदने आप नहीं जा रहे हैं बल्कि अपनी कामवाली या अपने घर काम करने वाले नौकर को भेज रहे हैं तो उसके हाथ में अपना क्रेडिट या डेबिट कार्ड देने में आपका हिचकिचाना लाजिमी है। लेकिन आप अपना प्रीपेड कार्ड उनके हाथ में आसानी से थमा सकते हैं क्योंकि उसमें एक खास सीमा तक ही रकम मौजूद है। यहां तक कि अगर किसी शादी में तोहफ ा देने के लिए आपके पास नकदी नहीं है तो आप प्रीपेड गिफ्ट कार्ड भी दे सकते हैं।

ऑनलाइन बैंकिंग या इंटरनेट बैंकिंग:
नेट बैंकिग जिसे ऑनलाइन बैंकिंग या इंटरनेट बैंकिंग भी कहते हैं,  के माध्यम से
बैंक ग्राहक अपने कंप्यूटर द्वारा अपने बैंक नेटवर्क और वेबसाइट को ऑपरेट कर सकते है। इस प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ है कि कोई भी व्यक्ति घर या कार्यालय या कहीं से भी से बैंक सुविधा का लाभ उठा सकता है। ऑनलाइन बैंकिंग इंटरनेट पर बैंकिंग संबंधी मिलनेवाली एक सुविधा है  जिसके माध्यम से कंप्यूटर का इस्तेमाल कर उपभोक्ता बैंकों के नेटवक्र्स और उसकी वेबसाइट पर अपनी पहुंच बना सकता है और घर बैठे ही खरीददारी, पैसे का स्थानांतरण के अलावा अन्य तमाम कार्यों और जानकारी के लिए बैंकों से मिलने वाली सुविधा का लाभ उठा सकता है। भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किये गए शुरुआती आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2008 से जनवरी 2009 तक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से 55,8585 करोड़ रुपए का लेनदेन किया गया।

डेबिट कार्ड:
आपको पता होगा कि एटीएम कार्ड एक तरह का  डेबिट कार्ड होता है इसके द्वारा हम ऑनलाइन बैंक ट्रांसेक् शन कर सकते हैं और । एटीएम के द्वारा हम किसी भी एटीएम  मशीन से पैसे निकाल सकते हैं डेबिट कार्ड प्रीपेड सिम की तरह होता है अगर हमार सिम  मैं बैलेंस हुआ तो हम कहीं भी कॉल कर सकते हैं उसी प्रकार अगर हमारे  डेबिट कार्ड में पैसा होगा तो हम उस पैसे को ट्रांजैक्शन कर सकते हैं अगर सिम में बैलेंस नही है तो  कॉल नही कर सकते उसी प्रकार हम बैंक बैलेंस न होने  डेबिट कार्ड का उपयोग नही कर सकते है बैंक का  एटीएम कार्ड एक डेबिट कार्ड हो सकता है डेबिट कार्ड का मतलब ऑनलाइन बैंकिंग ट्रांजैक्शन ऑनलाइन खरीदारी आदि से है बढ़ती हुए तकनीक से हमें फायदा मिला है पहले बैंक से पैसे निकालने के लिए हमें बैंक जाना पड़ता था पर अब  एटीएम कार्ड द्वारा हम पास के किसी भी  एटीएम मशीन से पैसा निकाल सकते है। ऑनलाइन खरीदने से लेकर ऑनलाइन किसी भी तरह का पेमेंट किया जा जा सकता है।

क्रेडिट कार्ड:
क्रेडिट कार्ड से हमें एक सुविधा प्राप्त होती है जरुरत पडऩे पर हम अपने बैंक अकाउंट में जमा राशि से अधिक राशि का प्रयोग कर सकते है और उस राशि को ऊँची ब्याज के साथ बैंक अकाउंट में निश्चित समय तक जमा करवाना होता है । जरुरत पडऩे आवश्यकता पूरी हो जाये ये अच्छी बात है पर  क्रेडिट कार्ड  से सेविंग कर पाना मुश्किल हो जाता है । जरुरत पडऩे पर हम क्रेडिट कार्ड  से एटीएम द्वारा पैसा भी निकाल सकते है

एक सुविधा ये भी है की किसी जरुरत मंद वस्तु को खरीदने के लिए ईएमआई का आप्शन भी चुन सकते हैं । जिसमे आपको पूरी रकम एक साथ देने की जरूरत नहीं है उसकी पेमेंट किस्तों में दिया जा सकता है

उदाहरण: हमें एक टीवी खरीदना है उसकी कीमत 6000 रुपए है और हम एक साथ  पेमेंट नही करना चाहते है हम क्रेडिट कार्ड की मदद से कुछ किस्तो में  पेमेंट करेंगे और वो किस्तें बैंक से अपने आप पेड होती चली जाएँगी या हम ऐसे कहे की इससे एक प्रकार की लोन सुविधा भी मिलती है तो गलत नहीं होगा
एक सरल शब्दों में समझने की कोशिश की जाये तो जिस प्रकार घर में पोस्टपेड कनेक्शन लगे होते है जिनमे कोई  बैलेंस नही होता है और महीने भर बात करने के बाद बिल आ जाता है और उसका पेमेंट करना पड़ता है उसी प्रकार के्रडिट कार्ड होता है

आपने जाना कि डेबिट कार्ड व क्रेडिट कार्ड में क्या अंतर है पर अगर आप सेविंग के लिए डेबिट कार्ड कम एटीएम कार्ड का उपयोग कर सकते है जिससे आप जरुरत पडऩे पर जितने पैसे निकलना चाहे तो निकल सकते हंै जबकि क्रेडिट कार्ड से बैंक बैलेंस से अधिक  राशि निकलने पर एक तरह का हम पर  उधार हो जाता है जो कोई भी नहीं चाहता।  क्रेडिट कार्डंतक से अनावश्यक खर्चे बढ़  जाते है जरुरत पढऩे पर उपयोग किया जाये तो क्रेडिट कार्ड   तक के फ ायदे ही फ ायदे हैं।

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