9 टिप्स – पीसीओडी की समस्या से छुटकारा पायें | 5 Tips for Controlling PCOD

1
Tips for Controlling PCOD
Tips for Controlling PCOD

पीसीओडी की समस्या— बिगड़ती लाइफस्टाइल और गड़बड़ाते हार्मोन्स

महिलाओं और लड़कियों में छह महीने तक नियमित पीरियड नहीं आए। अनचाहे बालों के साथ-साथ चिड़चिड़ापन और मुहांसे हो रहे हों तो इन लक्षणों को अवॉइड नहीं करें। यह पीसीओडी बीमारी यानी पोलोसिस्टिक ओवरी के लक्षण हैं। हार्मोनल डिसऑर्डर के कारण होने वाली इस बीमारी में यूट्रस में छोटी-छोटी गांठें हो जाती हैं। शहर के गाइनीकोलॉजिस्ट्स के मुताबिक लड़कियों और महिलाओं की बिगड़ती लाइफस्टाइल के कारण इस बीमारी के केसों में इजाफा हो रहा है। इससे महिलाओं को मां बनने में परेशानी आती है।

कुछ महिलाओं में यह जेनेटिक बीमारी होती है तो कुछ में बिगड़ती लाइफस्टाइल के कारण हो रही है। इसमें पीरियड अनियमित हो जाते हैं। अक्सर चार से छह महीने के अंतराल में पीरियड होते हैं जबकि बारह में से छह महीने नियमित पीरियड सामान्य होता है। छह महीने तक नियमित पीरियड नहीं आने पर डॉक्टर से परामर्श लें। इस बीमारी से ग्रसित महिलाओं में प्रेग्नेंट होने की क्षमता कम हो जाती है। पीसीओडी से ग्रसित 40 प्रतिशत महिलाओं में एलएच नाम का स्राव अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके कारण एग के मेच्योर होने की प्रक्रिया जल्दी हो जाती है। इसलिए अबॉर्शन होने की संभावना सामान्य महिलाओं के मुकाबले दुगुनी होती है।

पीसीओडी से ग्रसित हर 10 में से एक महिला—
हर दस में से एक महिला पीसीओडी से ग्रसित होती है। सामान्य की तुलना में इन महिलाओं में अन्य बीमारियां ज्यादा होने की संभावना होती है। इन महिलाओं में डायबिटीज, हार्ट अटैक और यूट्रस का कैंसर हो सकता है। गाइनीकोलॉजिस्ट डॉ. विनीता पाटनी ने बताया कि इस बीमारी से ग्रसित महिलाओं में हार्मोन्स की गड़बड़ी और सभी लक्षण एक जैसे नहीं होते हैं। एक हार्मोनल टेस्ट से इनकी पहचान करना मुश्किल है। लाइफस्टाइल में बदलाव और नियमित एक्सरसाइज करके वजन को नियंत्रित रखें। योगा से मसल्स को मजबूत बनाएं। फास्ट फूड अवॉइड करें।

ऐसे होता है डायग्नोसिस–
पीसीओडी से ग्रसित महिलाओं में हार्मोन्स की गड़बड़ी और सभी लक्षण एक समान नहीं होते हैं। लड़कियों में ट्रांस एब्डॉमिनल यानी पेट की सोनोग्राफी से डायग्नोस कर सकते हैं। महिलाओं में ट्रांस वजाइनल सोनोग्राफी भी विकल्प है। इसके अलावा एस इंसुलिन, टी 3, टी ४टीएसएच, एफएसएच, एलएच, प्रोलेक्टिन, एस. टेस्टोस्टेरान, एस. ईस्टरेडिओल और एसएचबीजी आदि हॉर्मोन टेस्ट से डायग्नोस कर सकते हैं। ओवरी में दो एमएम से लेकर आठ एमएम तक के आठ-दस से ज्यादा अंडे होने पर यह मल्टीसिस्टिक ओवरी कहलाती है। हार्मोन में असंतुलन पाए जाने पर यह पीसीओडी में तब्दील हो जाती है।

लक्षण—
मोटापा,अनियमित पीरियड, पुरुषों की तरह चेहरे, हाथ-पैर पर बाल आना, इन्फर्टिलिटी, इंसुलिन का रेजिस्टेंस होना। 40 साल के बाद डायबिटीज, यूट्रस के कैंसर की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

इलाज—-
उम्र और लक्षण के आधार इलाज किया जाता है। लड़कियों में इलाज के दौरान मेल हॉर्मोन को कम करने के लिए टेबलेट दी जाती है। पीसीओडी की वजह से जिन महिलाओं को मां बनने में दिक्कत रही है, उनको हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं।

1 COMMENT

  1. Hello There. I found your weblog the usage of msn.
    That is a very neatly written article. I will make sure to bookmark it
    and return to learn more of your helpful info.
    Thank you for the post. I will certainly comeback.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here