Career Planning Top 10 Tips – करियर प्लानिंग -10 टिप्स काम की

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career planning tips

आप स्कूल व कालेज में भी अध्ययन करने के बाद भविष्य की सोचते हैं और उसी अनुसार अपनी प्लानिंग करते हैं तो करियर की क्यों  नहीं…। करियर प्लानिंग कोई बेहद दुरूह कार्य नहीं है,न ही इसे टालते रहने की आवश्यकता है, आवश्यकता है  इसे लक्ष्य मान कर उसी के अनुसार स्वयं को तैयार करने की।
इसलिए बेहतर होगा कि स्वयं की वर्तमान जॉब के अनुसार अपने करियर पाथ का अवलोकन करें कि क्या आप सही दिशा में जा रहे हैं अथवा नहीं। यदि आपकी जॉब में नापसंद एक्टिविटि•ा की लिस्ट ज्यादा लम्बी है, तो यह समय है आप अपने जॉब व करियर के बारे में गम्भीरतापूर्वक विचार करें। केवल उन्हीं लक्ष्यों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ें, जो आपको सफलता व खुशी दोनों दिला सकें। अपनी पूर्व उपलब्धियों की सूची बनाने का समय निकालें। क्योंकि अधिकतर प्रोफेशनल्स अपनी स्वयं की अचीवमेंट्स की लिस्ट तैयार नहीं करते, और नई जॉब पाने के वक्त उन्हें अपना रिज्यूमे तक बनाने में बेहद कठिनाई आती है। करियर प्लानिंग में यह बेहद जरूरी है कि अपने अचीवमेंट्स का रिकार्ड रखें। कभी कभी ऐसा भी होता है कि अपने वर्तमान जॉब के  दैनिक क्रिया-कलापों में आप इतना खो जाते हैं कि अन्य करियर संभावनाओं के बारे में सोच भी नहीं पाते। लेकिन इसके लिए अतिरिक्त प्रयत्नों की आवश्यकता रहती है। करियर व जॉब ट्रेण्ड्स के बारे में स्वयं को अपडेट करते रहें,यह उपयोगी हो सकता है जब आप  पाते हैं कि आपकी पिछली जॉब में इतनी संभावनाएं नहीं बचीं हैं व किसी नए क्षेत्र के बारे में पूर्ण जानकारी रखते हैं और स्वयं को उसी के अनुरूप ढाल कर अपने करियर को नई दिशा दे पाने में सफल होते हैं। विभिन्न कोर्सेज  आदि के द्वारा अपने स्किल्स को सदैव बढ़ाते रहें यह उपयोगी साबित होगा,यह अवश्य ख्याल रखें कि उसी क्षेत्र में आगे बढऩे की कोशिश करें जिनमें आप जानते हैं कि आप की रूचि भी है व योग्यता भी। इसलिए आवश्यक है कि करियर संबंघी शॉर्ट टर्म गोल्स के साथ साथ  लॉंग टर्म गोल्स भी बनाएं और इसी अनुसार अपनी योजना का क्रियान्वन करें आप करियर में सफलता की सीढिय़ां चढ़ते चले जाएंगे।

करियर की जब बात आती है,तो इस बात का ख्याल रखें कि आगे बढऩे के लिए सदैव स्वयं को तैयार करते रहना जरूरी है।

अपनी पसंद-नापसंद और आवश्यकताओं को टटोलें, कोई ऐसा काम भी हो सकता है जिसे हम 2 वर्ष पूर्व करने में स्वयं को सहज महसूस करते थे,उसमें खुशी महसूस करते थे, आज शायद उसमें फुलफिलमेंट की भावना महसूस नहीं करते।

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