आरती श्री तेजाजी की

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थांरा हाथा माही कलश बड़ो भारी कुंवर तेजाजी हावो

साबत सुरा ओ

धौरे धौरे आरती उतारू तेजा थांकी ओ।

लीलो घोड़ो असवारो कुंवर तेजाजी। हाँ वो सावत सुरा ओ

धौरे धौरे आरती उतारू तेजा थांकी ओ।

सावली सुरत काना मोती कुंवर तेजाजी। हॉ वो

पेरियो थे तो कोट जरी को कुंवर तेजाजी। हॉ वो

बॉध्या थे तो पंचरंग पागा कुंवर तेजाजी। हॉ वो

थारा गला माय झुले वासक राजा कुंवर तेजाजी। हॉ वो

कलयुग जोत सवाई कुंवर तेजाजी। हॉ वो

खेडेखेडे देवली बनाय कुंवर तेजाजी। हॉ वो

बेटो है यो जाट को ने अमर कमायो नाम रे। हॉ वो

नौमी धारी रात जगावा कुंवर तेजाजी। हॉ वो

दसमीं को मेलो भरवे कुंवर तेजाजी। हॉ वो

नौमी थारा दूध चढ़वा कुंवर तेजाजी। हॉ वो

दसमीं रो चुरमो चढ़ावा कुंवर तेजाजी। हॉ वो

बाला की ताती बधावा कुंवर तेजाजी। हॉ वो

काला रो खायोंडो आवै कुंवर तेजाजी। हॉ वो

भैरूजी नारेल चढ़ावा कुंवर तेजाजी। हॉ वो

मिणा ने मार भगाया कुंवर तेजाजी। हॉ वो

बांध्या थे तो ढ़ाल गेंडा की कुंवर तेजाजी। हॉ वो

धारा हाथा में ही भालो बिजण सारो कुंवर तेजाजी। हॉ वो

धन थरी जामण जावो कुंवर तेजाजी । हॉ वो

पाणी री छणयारी धारी धरम केरी बेन्वा वो। हॉ वो

गावे थानै लोग लुगाया कुंवर तेजाजी

धौरे धौरे आरती उतारू कुंवर तेजाजी रे।।

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