आरती श्री गुरूनानक देव जी की

0

 

गगन में थालु रवि चंदु दीपक बने,

तारिका मंडल जनक मोती।

धूममल आनलो पवनु चंवरो करे,

सगल बनराई पुलन्त जोती।

कैसी आरती होई भव खण्डना तेरी आरती।

अनहता सबद बाजत भेरी। रहाउ।

सहस तव नैन नन नैन है तोहि कउ,

सहस मूरति नना एक तोही।

सहस पद विमल नन एक पद गंध बिनु

सहस तव गन्ध इव चलत मोहि।

सब महि जोति जोति है सोई,

तिसके चानणि सभ महि चानणु होई।

गुरसाखी जोति परगटु होई,

जो नित भावे सु आरती होई।

हरि चरण कमल मकरन्द लोभित मनो,

अनदीनो मोहि आही पिआसा।

कृपा जल देहि नानक सारिंग कउ,

होई जाते तेरे नामि वासा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here