आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए…..

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बदलती लाइफ स्टाइल में अत्यधिक पॉल्युशन, शारीरिक कमजोरी का असर बच्चों बड़ों की आखों पर देखने को मिल रहा है। इससे आंखों में कमजोरी, दिखाई कम देना, आंखों में फुंसी का होना, आंखों से बार-बार पानी आना, आंखों में जलन होना, आंखें ड्राई रहने जैसी समस्याएं होती हैं।
कमजोरीदूर करने के लिए ये करें-
-दोचम्मच त्रिफला को पानी में भिगो कर ८ घंटे के लिए छोड़ दें, फिर उसे निथार कर उससे आंखों को दिन में दो बार धोएं।
-आयुर्वेदिक दवाइयां- आंखों की समस्या होने पर रोगी को १२५ मिली ग्राम सप्तामृत लोह शहद में मिला कर दिन में दो बार दें। इसके साथ ही लोहासव दो चम्मच सुबह-शाम दिन खाने के बाद पानी में मिला कर दें।
-रोगी को नेत्र तर्पण दें। आंखों पर ठंडी पट्टी रखें।
-रोगी को लौकी, टमाटर, गाजर और पालक का जूस या सूप पिलाएं। 6रोगी को नियमित रूप से मुनक्का, किशमिश, आंवला, गाजर दें।
-रोजाना एक गिलास दूध के साथ एक चम्मच च्यवनप्राश भी दें।
-लाल मिर्च की जगह काली मिर्च दें।

आजकल बच्चों से लेकर एडल्ट ऐज ग्रुप में आंखों की रोशनी कम होना सामान्य प्रॉब्लम बन रही है। वंशानुगत डायबिटीज, हाइपरटेंशन, स्ट्रेस और ज्यादा स्टडी करना आदि मुख्य कारण है। वहीं, प्रॉपर न्यूट्रीशियन की कमी के चलते भी बच्चों में यह प्रॉब्लम बढ़ रही है। चालीस साल से नीचे भी यह प्रॉब्लम देखने को मिल रही है। चालीस साल की उम्र के बाद यदि पास का चश्मा है तो इसे अवॉइड नहीं करें।
कैसेपहचानें : सिरमें दर्द, आंखों में दर्द, पढ़ते समय धुंधला दिखाई देना, आंखों से पानी आना।
प्रिवेंशन: कोई मेडिसिन नहीं है। चश्मा लगाना ही विकल्प है। हरी सब्जियां और विटामिन युक्त चीजें ज्यादा खाएं।

आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए सुबह-सुबह हरी घास पर चलना चाहिए। प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार गाजर, चुकंदर और पालक का सूप या जूस पिलाएं, त्राटक क्रिया का अभ्यास कराएं, रोजाना एक गिलास दूध के साथ एक चम्मच च्यवनप्राश भी दें, लाल मिर्च की जगह काली मिर्च दें। चालीस के बाद चश्मा अवॉइड नहीं करें।

त्रिफला चूर्ण से आंखों की सफाई करें। हरड़, बरड़ और आंवले के मिक्स पाउडर से तैयार त्रिफला को रात भर मिट्टी के बर्तन में पानी में भिगो कर छोड़ दें। सुबह उसी पानी से आंखों को अच्छी तरह से धोएं।
-नीम के शहद को आंखों में काजल की तरह लगाएं।
-सो कर उठने के बाद पहले लार को अपनी आंखों में काजल की तरह दस से पंद्रह दिनों तक लगाएं।
-रोगी को गाजर, चुकंदर और पालक का सूप या जूस पिलाएं।
-त्राटक क्रिया का अभ्यास कराएं।
-पाद स्नान दें जिसमें गर्म पाद स्नान और ठंडा पाद स्नान शामिल हो।
-मिट्टी पट्टी उपचार दें।
-रोजाना एक आंवला या आंवले की चटनी खिलाएं। इसके साथ ही विटामिन सी युक्त फलों का सेवन भी कराएं।

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